राष्ट्रपति ने कहा कि विकास से संबंधित प्रत्येक प्रयास की सराहना की जानी चाहिए। जुगाड़, कट-पेस्ट प्रयोग और कम लागत के नवाचार की भी अपनी भूमिका होती है। अगर हम भारत को मिडिल इनकम अर्थव्यवस्था और आधुनिक औद्योगिक महाशक्ति में परिवर्तित करना चाहते हैं तो हमें ज्ञान पैदा करने के अपने साधनों को उन्नत बनाने की जरूरत है।
पेटेंट के क्षेत्र में लंबी छलांग
कोविंद ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय विकास के एजेंडा में विज्ञान और तकनीकी नवाचार का महत्व व भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। 2017 में भारतीय स्टार्ट अप के तहत पेटेंट के लिए 909 आवेदन पत्र आए। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप स्कीम की घोषणा की है। इसी का नतीजा है कि पेटेंट के लिए आए ये आवेदन वर्ष 2016 के मुकाबले 15 गुना हैं।
2018 में रिसर्च एंड डवलपमेंट के क्षेत्र में भारत 83.27 अरब डॉलर निवेश करेगा। यह नवाचार के माध्यम से विकास को बढ़ावा देने वाला कदम साबित होगा। वर्ष 2018-19 से अगले सात वर्षों के लिए नवाचार को 1650 करोड़ रुपये का बजट भी रखा गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि विज्ञान तब अपने सबसे अच्छे परिणाम देता है, जब संसाधन, पर्याप्त फंड और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह शोध केंद्रों और विश्वविद्यालयों के बीच सहभागिता का युग है।
उन्होंने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे नवोदित शोधार्थियों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनें। उनके लिए अपने दरवाजे खोलें। ऐसा हुआ तो भारत के ज्ञान-विज्ञान को कुलांचे भरने से कोई नहीं रोक सकता। यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को दुनिया में सबसे बेहतर बनाएगा।