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विज्ञान के क्षेत्र में नहीं हो पा रहा बेटियों की प्रतिभा का समुचित इस्तेमाल: राष्ट्रपति

Sat, 06 Oct 2018 04:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद - फोटो : amar ujala
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश में वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में महिलाओं की कम भागीदारी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाएं काफी कम हैं। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) में 3446 वैज्ञानिक काम कर रहे हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 18.3 फीसदी यानी 632 महिलाएं हैं।

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उन्होंने कहा, ऐसे वैश्विक परिवेश में जब महिलाएं भौतिकी और रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पा रही हैं, यह उचित नहीं लगता। यह इस बात का प्रतीक है कि हम अपनी बेटियों की वैज्ञानिक मेधा का समुचित ढंग से उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। यह हमारे लिए सामाजिक व व्यवस्थागत चुनौती है। अपने समाज को इससे उबारने की भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

राष्ट्रपति शनिवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चौथे भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान समारोह के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि विज्ञान हमेशा से भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। शताब्दियों पहले हमारे पूर्वजों ने गणित के रहस्य खोले। विश्व को शून्य की अवधारणा दी। वे दवाओं और धातु के क्षेत्र में विज्ञान का अधिकाधिक प्रयोग कर रहे थे। हरित क्रांति से लेकर अंतरिक्ष कार्यक्रम और बायोटेक से लेकर फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री तक हम काफी आगे बढ़ चुके हैं। आजादी के बाद का हमारा विकास विज्ञान केंद्रित ही रहा है।
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21वीं शताब्दी के शुरुआती 25 वर्ष औद्योगिक क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि यह रोबोटिक्स, विनिर्माण, जैव सूचना विज्ञान और जीन बदलाव का युग है। यह लंबी छलांग हम विज्ञान को जन आंदोलन में बदले बिना हासिल नहीं कर सकते। अपनी प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों और स्कूलों में नवाचार को बढ़ावा दिए बिना यह लक्ष्य नहीं पा सकते।

जुगाड़ की भी अपनी भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि विकास से संबंधित प्रत्येक प्रयास की सराहना की जानी चाहिए। जुगाड़, कट-पेस्ट प्रयोग और कम लागत के नवाचार की भी अपनी भूमिका होती है। अगर हम भारत को मिडिल इनकम अर्थव्यवस्था और आधुनिक औद्योगिक महाशक्ति में परिवर्तित करना चाहते हैं तो हमें ज्ञान पैदा करने के अपने साधनों को उन्नत बनाने की जरूरत है।

पेटेंट के क्षेत्र में लंबी छलांग
कोविंद ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय विकास के एजेंडा में विज्ञान और तकनीकी नवाचार का महत्व व भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। 2017 में भारतीय स्टार्ट अप के तहत पेटेंट के लिए 909 आवेदन पत्र आए। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप स्कीम की घोषणा की है। इसी का नतीजा है कि पेटेंट के लिए आए ये आवेदन वर्ष 2016 के मुकाबले 15 गुना हैं।

2018 में रिसर्च एंड डवलपमेंट के क्षेत्र में भारत 83.27 अरब डॉलर निवेश करेगा। यह नवाचार के माध्यम से विकास को बढ़ावा देने वाला कदम साबित होगा। वर्ष 2018-19 से अगले सात वर्षों के लिए नवाचार को 1650 करोड़ रुपये का बजट भी रखा गया है।
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शोध केंद्रों और विश्वविद्यालयों के बीच हो सहभागिता

राष्ट्रपति ने कहा कि विज्ञान तब अपने सबसे अच्छे परिणाम देता है, जब संसाधन, पर्याप्त फंड और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह शोध केंद्रों और विश्वविद्यालयों के बीच सहभागिता का युग है।

उन्होंने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे नवोदित शोधार्थियों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनें। उनके लिए अपने दरवाजे खोलें। ऐसा हुआ तो भारत के ज्ञान-विज्ञान को कुलांचे भरने से कोई नहीं रोक सकता। यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को दुनिया में सबसे बेहतर बनाएगा।
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