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अब क्या करते हैं अटलजी, कैसा है उनका जीवन, जानें- उनकी दिनचर्या

Mon, 26 Dec 2016 06:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अट‌ल बिहारी वाजपेई - फोटो : amar ujala
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करिश्माई वक्ता और भारतीय राजनीति के बेदाग नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का 92वां जन्मदिन है। सबके बीच होते हुए भी वह सत्ता के गलियारे से दूर हैं।
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इसके बावजूद अब भी उनका नाम भाजपा की चुनावी नैया पार लगाने के लिए अहम है। यशस्वी प्रधानमंत्री के जीवन के अनछुए पहलुओं को पिछले पांच दशक से उनके सहयोगी शिव कुमार से अमर उजाला ने समझने का प्रयास किया:

अटलजी न स्वस्थ हैं न अस्वस्थ हैं, वृद्धावस्था से ग्रस्त हैं। अहंकार नामक चीज उनमें नहीं है। उनकी सौम्यता के कारण ही उनसे एक बार मिलने वाले व्यक्ति का बार-बार उनसे मिलने का मन करता है। उन्हें कभी नाराज होते नहीं देखा।
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एक बार मैंने बड़ी गलती कर दी बावजूद उसके अटलजी ने मुझे टोका तक नहीं। अटलजी को बंगलूरू से देर शाम लौटना था। इस बीच उनके फिरोजशाह रोड स्थित बंगले पर जेपी माथुर आए। वह मुझे जबर्दस्ती फिल्म देखने ले गए। सिनेमा खत्म होने के बाद मैं अटलजी को लेने एयरपोर्ट पहुंचा तो पता चला जहाज समय से पहले आ गया। अटलजी को खोजा तो मिले नहीं।

मुझसे बताते तो मैं भी चलता...

मैं वापस बंगले के करीब आया तो गाड़ी को दूर छोड़कर दबे पैर आकर मकान का चुपके से ताला खोला। इतने में निगाह लॉन में पड़ी। अटलजी सामान रखकर इधर-उधर टहल रहे थे। चूंकि चाबी मेरे ही पास थी।

उनकी निगाह मुझ पर पड़ी, लेकिन डांटने के बजाय पूछा यार कहां गए थे। मैंने कहा माथुर जी के साथ फिल्म देखने चला गया था। अटलजी गुस्सा होने के बजाय कहा मुझे भी बताए होते मैं भी चलता। दूसरा नेता होता तो शायद इस गलती के लिए खरी-खोटी सुनाता।

देश में सड़कों का विकास, नदियों को जोड़ना, दरिद्र नारायण की सेवा और डिजिटलाइजेशन का विस्तार अटल के हमेशा से चार सूत्र रहे हैं। जीवन के सार के बारे में उनका यही कहना रहा कि जो जमीन पर चलता है उसे मालूम है कि गड्ढे कहां हैं।

सड़क के विकास की कल्पना अटल को लखनऊ के चिन्हरा से एक सभा संबोधित कर लौटते हुए सामने घटी घटना से हुई। चिन्हरा से बीस किलोमीटर दूर जब सभा संबोधित कर लौट रहे थे तो कुछ लोग खटिया पर एक बुजुर्ग महिला को ले जा रहे थे। उनके पूछने पर बताया कि महिला की तबियत खराब है 20 किलोमीटर ऐसे ही कंधे पर लाद कर ले जाना पडे़गा।

तभी अटल ने देश के हर गांव को सड़क से जोड़ने का प्रण लिया और स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना उसी का परिणाम है। पानी की बर्बादी को देख नदियों को जोड़ने का उनका देखा सपना भी केन-बेतव के जरिए जल्द साकार होने वाला है।

'विरोधियों पर कभी कमर के नीचे वार नहीं किया'

अटलजी की राजनीतिक शैली सबसे जुदा थी। उन्होंने कभी अपने विरोधियों पर कमर के नीचे वार नहीं किया। एक बार संसद में चर्चा के दौरान इंदिरा गांधी ने अटल पर सियासी वार करते हुए कहा कि संसद में एक ऐसे नेता हैं जो हाथ उठा-उठा कर हिटलर जैसा भाषण देते हैं। अटल जी को यह आरोप रास नहीं आया।

तत्काल उठते हुए उन्होंने कहा कि कोई ऐसा नेता नहीं है, जो टांग उठाकर बोलते हैं। अटल की यह बात सुन पूरे सदन में ठहाकों की गूंज उठी, खुद इंदिरा जी शर्माते हुए अपने आसन पर बैठ गईं।

अटल के ज्यादा खाना-खाने की बात गलत
अटलजी के बारे में यह चर्चा गलत फैली है कि वे ज्यादा भोजन करते थे। बकौल शिव कुमार उन्होंने अटलजी को कभी भी दो से ज्यादा रोटी खाते हुए नहीं देखा। खाने के बाद खीर पसंद थी। हालांकि वे मेजबान का दिल नहीं दुखाते थे।
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अटल की वर्तमान दिनचर्या

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अधिकांश समय लेटे रहकर गुजारते हैं। सुबह करीब 7-8 बजे उठते हैं। नित्यकर्म से निवृत्त होने के बाद फिजियोथेरेपिस्ट आते हैं। उन्हें एक्सरसाइज करवाने के लिए। करीब 11-12 बजे स्नान कराने के बाद वे तरल आहार लेते हैं। दलिया, खिचड़ी अथवा दूध में ब्रेड तोड़कर उन्हें खिलाया जाता है।

दोपहर 2 बजे के करीब सो जाते हैं। शाम को 5 बजे उठते हैं फिर थोड़ा टीवी देखते हैं। लोगों से मिलने पर पहचानते कम हैं। अटल से मिलने वालों में लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह और रविशंकर प्रसाद का नाम शुमार है।

आडवाणी माह में दो बार आकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते हैं। अटल से मिलने के बाद वे अक्सर आंसू निकालते हुए लौटते हैं। राजनाथ भी हर माह आते हैं।

जन्मदिन पर विशेष व्यवस्था
अटल के प्रति नेता और कार्यकर्ताओं के स्नेह को देखते हुए दिवाली और उनके जन्मदिन के दिन सभी को दर्शन कराया जाता है। भीड़ से बचने के लिए संघ अधिकारियों के दर्शन की व्यवस्था 24 शाम को की गई। तो वरिष्ठ नेताओं के लिए सुबह 11:30 बजे का समय निश्चित किया गया है। दोपहर 12 बजे के बाद 2 बजे तक आम जनता और कार्यकर्ता अटलजी के दर्शन कर उन्हें शुभकामना दे सकते हैं। (शिव कुमार से एम संजय की बातचीत पर आधारित)
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