यशवंत सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री कैबिनेट का मुखिया होते हैं लेकिन बराबरी में वह मंत्रिपरिषद में पहले नंबर पर होते हैं। आज कैबिनेट मंत्रियों की स्थिति क्या है? जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापसी और राज्यपाल शासन का फैसला होता है, लेकिन गृहमंत्री को जानकारी नहीं होती। राफेल सौदा हो जाता है लेकिन रक्षामंत्री को पता नहीं रहता।
नोटबंदी होने वाली है लेकिन कैबिनेट मीटिंग से पहले वित्तमंत्री को इसका पता नहीं लगता? कहा, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मैं भी विदेश मंत्री रहा हूं। मुझे याद नहीं कि विदेश दौरे से पहले प्रधानमंत्री ने मुझसे चलने के लिए न कहा हो लेकिन अब विदेश मंत्री से कभी दौरे पर चलने के लिए नहीं कहा जाता। वह बैठकर ट्वीट करती हैं। लोग उन्हें ट्विटर मंत्री या वीसा मंत्री कहने लगे।
यशवंत ने कहा, पिछले दिनों लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई गई। सभी जानते हैं कि उनका बचपन कितनी गरीबी में बीता, लेकिन क्या किसी को याद है कि शास्त्री ने कभी कहा हो कि वह गरीब परिवार से हैं। प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना कहा कि वह दावा करते हैं कि स्टेशन पर चाय बेचते थे लेकिन वह स्टेशन तो तब बना ही नहीं था
सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि राफेल पर देश सवालों के जवाब चाहता है। उन्होंने मोदी सरकार को वन मैन शो और टू मैन आर्मी बताया। कहा, वाजपेयी की सरकार में लोकशाही थी, आज तानाशाही है। उन्होंने फिर दोहराया, यदि सच कहना बगावत है तो हम भी बागी हैं। प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, दद्दा अब खोखले जुमलों, भाषणों से काम नहीं चलेगा।
व्यक्ति से बड़ी पार्टी और पार्टी से बड़ा देश होता है। हम देशहित की बात कर रहे हैं, लोगों की पीड़ा जाहिर कर रहे हैं, इसमें गलत क्या है? उन्होंने कहा, नोटबंदी पार्टी का फैसला नहीं था। पार्टी का फैसला होता तो आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा जैसे बड़े नेताओं और उनके जैसे कार्यकर्ताओं को जानकारी होती। नोटबंदी से उबरे नहीं थे कि जटिल जीएसटी लागू कर दी।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पीएम मोदी व सीएम योगी पर सवाल खड़े किए। बोले, प्रधानमंत्री कहते हैं कि गुरु नानक और कबीर दास समाज के बारे में बैठकर विचार करते थे। जिस मंच पर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण लीडर जमा होते हैं, वहां कहते हैं कि मुझे 600 करोड़ लोगों ने चुनकर भेजा है। सीएम योगी बंदर के आतंक से मुक्ति के लिए हनुमान चालीसा पढ़ने की सलाह देते हैं। कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण के लिए ठोकने की बात करते हैं। इसी का नतीजा है कि लखनऊ में निर्दोष को पुलिस ने मार डाला।