फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे ने फोरलेन आउटर के लिए शुरू की तैयारी, कब्जे आड़े आए तो हटाए जाएंगे, प्रशासन से मांगा सहयोग

Tue, 03 Sep 2019 05:04 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन
यात्रियों को जल्द ही आउटर पर ट्रेनों के रुकने से होने वाली परेशानियों से राहत मिल जाएगी। फोरलेन आउटर बनाने के लिए उत्तर रेलवे प्रशासन ने अपनी जमीन खोजनी शुरू कर दी है। पैमाइश के लिए रेलवे ने जिला प्रशासन से मदद मांगी है। ताकि चौहद्दी तय कर जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू करवाया जा सके।
विज्ञापन


चारबाग रेलवे स्टेशन उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल का एवन श्रेणी का स्टेशन है। यहां 280 से अधिक ट्रेनों से सवा लाख से ज्यादा यात्री रोजाना सफर करते हैं। स्टेशन पर नौ प्लेटफॉर्म हैं, जबकि इस लिहाज से ट्रेनों की संख्या काफी है। इससे गाड़ियों को आउटर पर रोकना पड़ता है। प्लेटफॉर्म खाली होने पर ट्रेनों को आउटर से स्टेशन लाया जाता है।

चारबाग स्टेशन के लिए है दो आउटर

प्रतीकात्मक तस्वीर
चारबाग स्टेशन के लिए दो आउटर हैं। आलमनगर व दिलकुशा। आलमनगर आउटर कानपुर रूट की ओर है, जबकि दिलकुशा रायबरेली रूट की तरफ। दोनों ओर से आने वाली गाड़ियों को इन आउटरों पर रुकना पड़ता है। इससे यात्रियों को असुविधाएं होती हैं।

यात्रियों की दिक्कतों को कम करने के लिए रेलवे बोर्ड की ओर से फोरलेन आउटर बनाने की योजना लाई गई। उसी के तहत आलमनगर व दिलकुशा से चारबाग तक चार-चार लाइनें बनाई जानी हैं, जबकि अभी दोनों ओर डबल लाइनें हैं। फोरलेन हो जाने से ट्रेनों को आउटर पर नहीं रोकना पड़ेगा।

इससे ट्रेनों की पंक्चुअलिटी भी सुधर जाएगी। डीआरएम संजय त्रिपाठी की पहल पर इस ओर काम शुरू कर दिया गया है। रेलवे ने आउटर के लिए अपनी जमीनों को खोजने का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मदद मांगी गई है।
विज्ञापन

सुधरेगी ट्रेनों की टाइमिंग

प्रतीकात्मक तस्वीर
हटाए जाएंगे कब्जे
आलमनगर व दिलकुशा से चारबाग के बीच फोरलेन होने के आड़े अगर कब्जे आए तो उन्हें हटवाया जाएगा। इसके लिए पुलिस बल की मदद ली जाएगी। जिला प्रशासन को लिखे गए पत्र में सहयोग मांगा गया है। वहीं भूलेख को भी खंगाला जाएगा, ताकि जमीनों की स्थिति बिलकुल स्पष्ट हो सके।

फोरलेन आउटर बनाने के लिए बजट में धनराशि भी आवंटित की गई है। इन लाइनों के बन जाने से ट्रेनों की टाइमिंग में भी सुधार की संभावनाएं जताई जा रही हैं। दरअसल, आउटर पर ट्रेनों के रुक जाने से पीछे से आने वाली गाड़ियां भी पिट जाती हैं और ऐसे पूरे रेलखण्ड पर संचालन बाधित होता है। इससे यात्रियों को दिक्कतों के साथ रेलवे को भी राजस्व का नुकसान होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें