कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव का क्षण है कि ध्यान योग को लेकर हम इतना बड़ा अभियान शुरू करने जा रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति की मौजूदगी हमारे लिए गौरव की बात है। शिक्षक के रूप में उनकी भूमिका बहुत अहम रही। पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक का सफर तय किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को इस बड़े अभियान के लिए बधाई। राजयोग के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का आप सभी प्रचार कर रहे हैं। यह केंद्र समाज को जोड़ने अहम भूमिका निभाएगा।
इस मौके पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि वर्ष 1937 में जब समाज व्याधियों से व्यथित था, ऐसे समय में इस संस्थान की नींव रखी गई। यह संस्था विभिन्न आयामों से राष्ट्र निर्माण की गतिविधियां निभा रही है। विश्व की यह विशाल संस्था नारी शक्ति द्वारा संचालित है। राजयोग मेडिटेशन वह साधन है जो व्यक्ति को सद्गुण की ओर अग्रसर करता है।
उन्होंने कहा कि राजयोग से सुख, शांति, पवित्रता जैसे गुण स्वतः आने लगते हैं। मेडिटेशन हमें सिखाता है कि आत्मा अमर अविनाशी है। राजयोग एक अभ्यास नहीं, बल्कि संपूर्ण सकारात्मक जीवन शैली है। मेडिटेशन हमें शृष्टि के चक्र का बोध कराता है। वर्तमान परिस्थितियां हमारे कर्मों का ही कल है। यह अपने आप से मिलने की अनुभूति है। यह हमें स्वयं को सुनना और शांत होना सिखाता है।
आध्यात्मिक अनुभव से मृत्यु का डर पीछे छूट जाता है
राज्यपाल ने आगे कहा कि ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थापना चुनौतीपूर्ण समय में हुई, जो वैश्विक चेतना का आरंभ था। विश्व शांति के लिए राजयोग बहुत जरूरी है। स्व परिवर्तन से ही जगत के परिवर्तन का रास्ता मिलता है। परिस्थितियों को दोष देने की प्रवत्ति पीछे छूट जाती है। आध्यात्मिक अनुभव से मृत्यु का डर भी पीछे छूट जाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओम शांति कहकर अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने ध्यान योग अभियान की शुरुआत के लिए ब्रह्मकुमारीज बहनों को धन्यवाद दिया। कहा कि मनुष्य ने विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में बेशक खूब तरक्की कर ली है, लेकिन समाज में तकनीकी उन्नति के साथ एकाकीपन, ईर्ष्या, अविश्वास और दुख भी बढ़ा है। इसके लिए मेडिटेशन एक कारगर उपाय हो सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि हम केवल आगे बढ़ने के लिए ही नहीं बल्कि स्वयं के भीतर झांकने की भी आदत डालें। विश्वास वहीं टिकता है, जहां विचार स्वस्थ और भावनाएं स्वच्छ होती हैं। हमारे भीतर आत्मिक चेतना जागृत होती है तो प्रेम, विश्वास और भाईचारा भी विकसित होता है। ब्रह्मकुमारीज संस्था की ओर से योग के माध्यम से पूरे विश्व में शांति, सुख और प्रेम का संदेश जन जन तक पहुंचाया जा रहा है। संस्था की ओर से नारी सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में भी किए जा रहे कार्य प्रशंसनीय है।