किसानों की नाराजगी की तमाम खबरों के बावजूद पश्चिमी यूपी ने जिस तरह भाजपा को समर्थन दिया तथा नतीजों से दलित वोटों की लामबंदी पार्टी के साथ मजबूत होती हुई दिखी, उसको देखते हुए रणनीतिकारों ने योगी-2 मंत्रिमंडल में जाट व जाटव समीकरणों को और पुख्ता करने की कोशिश की है। पश्चिम की सियासत में अब तक यह धारणा रही है कि जाट और जाटव एक जगह मतदान नहीं करता, लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा को जिस तरह जीत मिली उसने इस मिथक को काफी हद तक तोड़ा है।
भाजपा के रणनीतिकारों ने भी इसे समझा और 2024 के मद्देनजर मंत्रिमंडल में तीन जाट तथा तीन जाटव चेहरों के जरिए इन्हें भी साधने की कोशिश की है। विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद पीएम मोदी ने खुद यह कहा था कि ये नतीजे जातिवादी और परिवारवादी दलों की विदाई का संकेत हैं। मंत्रिमंडल में मोदी और शाह की हिंदुत्व के वृहद समीकरणों से जातीय गणित को पस्त करने की रणनीति का पूरा असर दिखाई दे रहा है। गिरीश यादव के रूप में जहां यह बताने की कोशिश हुई है कि पार्टी के लिए कोई अछूत नहीं है तो वहीं निषाद, राजभर, तेली, गड़रिया, कुम्हार, कहार जैसी अति पिछड़ी जातियों तथा धोबी, पासी, वाल्मीकि एवं कोरी जैसी अति दलित जातियों को प्रतिनिधित्व देकर भविष्य के लिए इन्हें भी साधा गया है।
इस तरह भी बिसात बिछाने की कोशिश
भाजपा गठबंधन में शामिल अपना दल नेता आशीष पटेल एवं निषाद पार्टी के संजय निषाद को कैबिनेट मंत्री बनाकर सहयोगियों को पूरा सम्मान देने का संदेश देते हुए तथा योगी कैबिनेट-1 के एकमात्र मुस्लिम चेहरे की जगह दानिश अंसारी के रूप में युवा मुस्लिम चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल कर 2024 की बिसात बिछाने का प्रयास हुआ है। आशीष के जरिए कुर्मियों व संजय के जरिए मल्लाह, निषाद व केवट जैसे समाज को सम्मान देने का संदेश दिया गया है।
दानिश के जरिए भी मुस्लिम पिछड़ी जातियों (पसमांदा समाज) को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि मोदी-योगी सरकार की सिर्फ गरीब कल्याण योजनाओं का लाभ ही मुस्लिम पिछड़ी जातियों को नहीं दिया जा रहा है, बल्कि पार्टी उन्हें राजनीतिक हिस्सेदारी भी देने को तैयार है। बशर्ते वे राष्ट्रवादी सरोकारों का साथ दें। दानिश को भी पार्टी की इस कसौटी पर खरा उतरना होगा।
जन संतुष्टि व विपक्ष की घेराबंदी पर ध्यान
मंत्रिमंडल में पार्टी पदाधिकारी जेपीएस राठौर, दानिश आजाद अंसारी, नरेंद्र कश्यप, जसवंत सैनी एवं दयाशंकर मिश्र दयालु किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इसके बावजूद यह संदेश देने की कोशिश की गई है है कि पार्टी के लिए उपयोगिता होने पर उनके समायोजन तथा सम्मान का नेतृत्व स्वत: ख्याल रखेगा। इसी तरह बाराबंकी के बड़े नेता तथा सपा सरकार में प्रभावी मंत्री रहे अरविंद सिंह गोप तथा उनसे पहले स्व. राजीव कुमार सिंह को हराकर दरियाबाद सीट से लगातार दो बार से जीत रहे सतीश शर्मा जैसे युवा चेहरे को जगह देकर पद से कद बढ़ाने का संदेश दिया गया है।
यही नहीं, तमाम अटकलों के बाद योगी सरकार-2.0 में पूर्व नौकरशाह अरविंद शर्मा एवं असीम अरुण जैसे चेहरों को जगह देकर नए मंत्रियों को पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस पर फोकस करने की नसीहत देते हुए 2024 की बाजी जीतने की तैयारी की गई है। शायद इसी वजह से राकेश सचान, जितिन प्रसाद, नरेन्द्र कश्यप, जयवीर, दिनेश प्रताप सिंह, नितिन अग्रवाल जैसे दूसरे दलों से आए कई चेहरों को महत्व देकर बिसात बिछाई गई है। इससे साफ पता चलता है कि भाजपा के रणनीतिकारों का मकसद इस मंत्रिमंडल के अभी से सपा, बसपा एवं कांग्रेस की पुख्ता घेराबंदी करना है।