वेतन-पेंशन पर संकट के बन गए थे आसार
प्रीपेड मीटर लगने के बाद जलकल विभाग में कर्मचारियों के वेतन, पेंशन पर भी असर पड़ने वाला था। इसका कारण यह है कि अभी तक सरकार ही बिजली बिल देती थी, मगर प्रीपेड मीटर लगने के बाद उन्हें रिचार्ज कराने के लिए जलकल विभाग को पैसा खर्च करना पड़ रहा था।
ऐसे में कर्मचारियेां के वेतन-पेंशन पर संकट आने के आसार बन गए थे, क्योंकि इसका और जलकल संचालन का खर्च विभाग को अपनी आय से करना होता है। प्रदेश सरकार इसके लिए अनुदान नहीं देती है। इसे लेकर जलकल महाप्रबंधक ने महापौर व नगर आयुक्त को समस्या बताई थी। नगर विकास मंत्री गोपाल टंडन को भी परेशानी बताई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर विकास मंत्री ने प्रमुख सचिव नगर विकास को निर्देश दिए। इसके बाद अब नलकूपों पर बिजली के प्रीपेड मीटर नहीं लगाए जा रहे हैं।
जलकल महाप्रबंधक एसके वर्मा ने बताया कि बालागंज, ऐशबाग और गोमतीनगर स्थित तीसरे जलकल सहित सभी 625 नलकूपों का एक महीने का बिजली करीब 6.50 करोड़ रुपये बनता है। ये बिल जलकल विभाग सत्यापित कर देता है, फिर बिजली विभाग शासन से इसका भुगतान लेता है।
बिजली विभाग पर एक साल का करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये वाटर और सीवर वाटर टैक्स बनता है, जिसे शासन बिल में समायोजित करता है। इसके अलावा कई साल पहले से शासन के आदेश पर हर महीने 15 लाख रुपये टोकन मनी के रूप में जलकल बिजली विभाग को देता आ रहा है।