मलिहाबाद। क्षेत्र में आम के बागवान जनवरी की शुरुआत में ही पेड़ों पर बौर आने से चिंतित हैं। बागवानों ने इसे बचाने की जद्दोजहद करना शुरू कर दिया है। अमूमन जनवरी के अंतिम सप्ताह के बाद दिखाई देने वाला यह बौर इस वर्ष समय से पहले आया है, जिससे बागवानों की आशंका है कि कहीं यह काला पड़कर गिर न जाए। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल फसल पर इसका कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, बशर्ते उचित बचाव के उपाय किए जाएं।
फल पट्टी क्षेत्र के अधिकतर बागवान आम की फसल पर निर्भर हैं। पूरे साल का इंतजाम इन्हीं बागों से होता है। शादी, पढ़ाई समेत पूरे साल का खर्च बागों की अच्छी फसल पर ही निर्भर करता है। श्रीराम, पुतान, शमीम, सहित अन्य बागवानों ने बताया कि सर्दी में इसको पाला से बचाना काफी मुश्किल होगा। पेड़ों में अत्यधिक रासायनिक खाद के इस्तेमाल के चलते समय से पहले बौर निकल आता है। ठंड के महीने में बौर के काला होकर गिरने का डर बना रहता है।
अवध आम उत्पादक एवं बागवानी समिति के महासचिव उपेंद्र कुमार सिंह कहते हैं कि जिन पेड़ों में पिछले वर्ष फल नहीं आए थे, अधिकतर उनमें जल्दी बौर निकलता है। 15 जनवरी के बाद ज्यादातर पेड़ों में फूल दिखना शुरू हो जाएंगे।
बागवान घबराएं नहीं, बचाव करें
कृषि विज्ञान केंद्र लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार दुबे ने कहा कि बागवान घबराएं नहीं, बचाव करें। वक्त से पहले निकले बौर पर सल्फर का स्प्रे दो से ढाई ग्राम प्रति लीटर पानी में डालकर करना चाहिए। इससे बौर को बचाया जा सकता है, जबकि जाला कीट से बचाव के लिए इस वक्त सिर्फ पानी से धुलाई करनी चाहिए। समय से पहले बौर का कोई विशेष असर फसल पर नहीं पड़ेगा। बागवानों को कलटार जैसे रसायनों के प्रयोग से बचना चाहिए। इससे वक्त से पहले ही पेड़ फल देना बंद कर देगा।
आम के पेड़ पर आए बाैर।