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नहीं पसीजे डॉक्टर, प्रसूता ने गेट पर तोड़ा दम

Tue, 10 Dec 2013 02:11 AM IST
मनीष कुमार सिंह/लखनऊ
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डॉक्टरों की संवेदनहीनता और स्वास्थ्य विभाग की सुस्त व्यवस्था ने रविवार देर रात एक गर्भवती महिला की जान ले ली। तबियत खराब होने पर घरवाले उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए।
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लेकिन डॉक्टर न होने के चलते उसे इलाज नहीं मिल सका। अस्पताल में मौजूद स्टाफ नर्स ने उसे दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

हालात गंभीर होने के बावजूद एंबुलेंस नहीं दी गई। इससे गर्भवती ने सीएचसी के गेट पर ही दम तोड़ दिया।

घरवालों ने सीएमओ से मामले की शिकायत की है। रविवार देर रात करीब एक बजे मलिहाबाद के शीतलन टोला के रहने वाले शंकर कश्यप की गर्भवती पत्नी विलासा (33) को अचानक पेट में दर्द हुआ।

उसे सात माह का गर्भ था। विलासा की हालत गंभीर होते देख पति और परिवार के अन्य लोग उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि वहां कोई डॉक्टर नहीं है।
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स्टाफ नर्स ने हालत गंभीर होने की बात कहकर उसे लखनऊ के लिए रेफर कर दिया। पति शंकर ने बताया कि पत्नी को ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग की लेकिन सिस्टर ने एंबुलेंस न होने की बात कहकर खुद गाड़ी की व्यवस्था करने की बात कही।

करीब दो घंटे तक विलासा दर्द से बेसुध अस्पताल के गेट के सामने तड़पती रही। इलाज और एंबुलेंस के अभाव में सुबह करीब चार बजे महिला ने दम तोड़ दिया।

महिला की मौत के बाद घरवालों ने अस्पताल की नर्स पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। नारेबाजी होती देख नर्स ने खुद को कमरे में बंद कर लिया।

इसके बाद परिवार के लोग शव लेकर वापस घर चले गए। सुबह अंतिम संस्कार करने के बाद पति शंकर कश्यप और परिवार के सदस्यों ने डॉक्टर और नर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए सीएमओ से शिकायत की है।
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