लखनऊ। राजधानी के वीरांगना अवंतीबाई महिला अस्पताल (डफरिन) में गर्भवती महिलाओं को इलाज और जांच कराने के लिए घंटों लंबी मशक्कत करनी पड़ रही है। परचा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और अल्ट्रासाउंड जांच तक छह से सात घंटे का समय लग रहा है। सोमवार को की गई अमर उजाला की पड़ताल में यह हकीकत सामने आई। गर्भवती महिलाओं का कहना है कि इलाज या जांच करानी है तो सुबह छह बजे तक अस्पताल पहुंचना पड़ता है, तभी डॉक्टर को दिखाने और जांच कराने का मौका मिल पाता है।
सुबह छह बजे लगी लाइन, दोपहर 12 बजे अल्ट्रासाउंड
राजाजीपुरम निवासी कांती (26) सुबह छह बजे अस्पताल पहुंचीं और अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लाइन में लग गईं। ओपीडी पंजीकरण का काम सुबह आठ बजे शुरू हुआ, जबकि जांच के टोकन 10 बजे से बंटने लगे। करीब 12 बजे जाकर कांती की अल्ट्रासाउंड जांच हो सकी। इसके बाद उन्हें रिपोर्ट लेकर डॉक्टर को दिखाने के लिए दोबारा लाइन में लगना पड़ा। उन्होंने बताया कि इलाज और जांच में छह-सात घंटे लग जाते हैं। इस दौरान हम भूखे-प्यासे बैठे रहते हैं।
छह घंटे बीतने के बाद भी जांच का इंतजार
दुबग्गा की सुभाषिनी (26) को भी इलाज के लिए सुबह परिजन अस्पताल लाए थे। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने और रक्त जांच कराने में तीन घंटे लग गए। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच लिखी, लेकिन कक्ष के बाहर दो घंटे और इंतजार करना पड़ा। उन्होंने बताया कि वह सुबह छह बजे आई थीं, लेकिन साढ़े छह घंटे बाद भी जांच नहीं हो पाई। दोपहर एक बजे तक बाहर बैठी रहीं।
120 जांच के बाद बंद हो जाता है अल्ट्रासाउंड कक्ष
डफरिन अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 500 से अधिक महिला मरीज और गर्भवती इलाज के लिए आती हैं। परचा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने तक ही डेढ़ से दो घंटे लग जाते हैं। हर दिन डॉक्टर 250 से अधिक गर्भवती महिलाओं को जांच लिखते हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की सीमित संख्या के कारण केवल 100-120 अल्ट्रासाउंड जांच ही संभव हो पाती है। बाकी मरीजों को अगले दिन की तारीख दे दी जाती है। वर्तमान में अस्पताल में दो रेडियोलॉजिस्ट ही जांच का कार्य संभाल रहे हैं।
Iअस्पताल में मरीजों का लोड बहुत अधिक है। गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।I
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- डॉ. रंजना प्रसाद,
सीएमएस, डफरिन अस्पतालI
डफरिन अस्पताल में मरीज।
डफरिन अस्पताल में मरीज।
डफरिन अस्पताल में मरीज।
डफरिन अस्पताल में मरीज।