जुलाई 2025 में पुलिस को दी गई शिकायत में प्रतीक ने बताया कि वर्ष 2011-12 में उनकी मुलाकात कृष्णानंद पांडेय से हुई थी। कृष्णानंद लगातार उन्हें विभिन्न कारोबारी प्रस्ताव देते रहे। करीब दो-तीन वर्षों तक संपर्क में रहने के बाद प्रतीक उनकी बातों में आ गए।
इसके बाद 25 मई 2015 को एक कंपनी बनाई गई, जिसमें कृष्णानंद पांडेय और यूएस विस्ट को निदेशक तथा प्रतीक यादव को प्रवर्तक बनाया गया। इसके बाद प्रतीक ने कंपनी में निवेश किया।
प्रतीक का आरोप है कि इसी परिस्थिति का फायदा उठाकर कृष्णानंद पांडेय उनपर पैसे देने का दबाव बनाने लगे। इस कथित साजिश में उनकी पत्नी वंदना पांडेय और पिता अशोक कुमार पांडेय भी शामिल थे। जब प्रतीक ने लेनदेन का हिसाब मांगा, तो आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी। बाद में उन्हें लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी गई।