फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्राण प्रतिष्ठा: अतिथियों को प्रसाद के रूप में दी जाएगी राम जन्मभूमि की मिट्टी, साथ में सरयू नदी का जल

Thu, 11 Jan 2024 07:04 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, अयोध्या

सार

प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान 16 जनवरी से प्रारंभ होगा। अनुष्ठान में शामिल होने वाले सभी आचार्य 15 जनवरी तक अयोध्या पहुंच जाएंगे।
विज्ञापन
अयोध्या में उमड़ेगी भक्तों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन में देश की 125 परंपराओं के चार हजार संत समेत विभिन्न क्षेत्रों की 2500 विशिष्ट हस्तियां शामिल हो रही हैं। उनके स्वागत की भव्य तैयारी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से की जा रही है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने वाले अतिथियों को प्रसाद के रूप में सरयू जल व राम जन्मभूमि की मिट्टी भी दी जाएगी। 

विज्ञापन


राममंदिर के नींव की खोदाई के दौरान गर्भगृह से जो मिट़्टी निकाली गई उसे एक डिब्बी में पैक कर अतिथियों को प्रसाद के रूप में दिए जाने की तैयारी हो रही है। इसके अलावा सरयू जल भी दिया जाएगा। एक ब्रास की थाली व राममंदिर से जुड़ी स्मृति के तौर पर एक चांदी का सिक्का भी अतिथियों को दिया जाएगा। उन उपहारों को एक जूट के बैग में दिया जाएगा, यह बैग भी खास होगा। बैग पर राममंदिर का इतिहास व उसके संघर्ष को दर्शाया जाएगा। हालांकि इसको लेकर ट्रस्ट ने कुछ भी कहने से इंकार किया है।

यजुर्वेद के मंत्रों से गूंज रहा राम जन्मभूमि परिसर
 रामजन्मभूमि में देवोत्थानी एकादशी से चल रहे चारों वेदों के पारायण के अंतिम चरण में बुधवार से यजुर्वेद का पारायण शुरू हुआ है। इससे पहले ऋग्वेद, सामवेद व अथर्ववेद का पारायण पूरा हो चुका है। अंतिम चरण में यजुर्वेद के पारायण के लिए अयोध्या समेत पूरे भारत से 111 वैदिक आचार्य अयोध्या पहुंचे हैं और बुधवार को विधिविधान पूर्वक अनुष्ठान का शुभारंभ किया। इस अनुष्ठान में 100 आचार्य वेद का पारायण कर रहे हैं जबकि 11 आचार्य वेद मंत्रों से आहुतियां डाल रहे हैं।बताया गया कि राम जन्मभूमि परिसर में बने यज्ञमंडप में यजुर्वेद का स्वाहाकार चल रहा है। 
विज्ञापन


यजुर्वेद में 40 शाखाएं व 1975 मंत्र हैं। शुक्ल यजुर्वेद के पारायण के साथ हवन हो रहा है। अन्य वेदों के पारायण के दौरान कम आचार्य थे, लेकिन यजुर्वेद का पारायण वृहद स्तर पर हो रहा है,इसलिए वैदिक आचार्यों की संख्या बढ़ाई गई है। सभी वेदों का पारायण होकर हवन की आहुतियां हो जाएं ताकि जो प्रतिष्ठा का क्रम है उसमें किसी प्रकार की कोई त्रुटि न रहे, इसी उद्देश्य से प्राण प्रतिष्ठा से पहले यह अनुष्ठान चल रहा है। वेदों में कर्मकांड, उपासना कांड और ब्रह्मकांड सब शामिल हैं। कर्मकांड में जो पूजा-पाठ होता है उसके मंत्र वेद में ही निहित होते हैं। ऐसे में वेदों के पारायण से कर्मकांड का एक चरण स्वत: पूरा हो जाता है।

15 को पहुंचेंगे 121 वैदिक आचार्य
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न कराने वाले 121 वैदिक आचार्य 15 जनवरी को अयोध्या पहुंचे। काशी के वैदिक आचार्य गजानन जी ने बताया कि अभी राम जन्मभूमि परिसर में जो अनुष्ठान चल रहा है वह प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान नहीं है। प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान 16 जनवरी से प्रारंभ होगा। अनुष्ठान में शामिल होने वाले सभी आचार्य 15 जनवरी तक अयोध्या पहुंच जाएंगे। इसी दिन मूर्ति निर्माण स्थल यानी कर्मकुटी का पूजन भी किया जाएगा।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें