छोटे से छोटे मुद्दे पर जोर-शोर से आवाज उठाने वाली पीपीएस एसोसिएशन लंबे समय से खामोश है।
मामला दरअसल यह है कि प्रदेश के मुखिया ने एसोसिएशन को काडर रिव्यू का लॉलीपॉप दिखा दिया है।
लेकिन महीने पर महीने बीतने के बावजूद काडर रिव्यू होना तो दूर अभी इसकी सुगबुगाहट तक नहीं है। इसके चलते दूसरे मुद्दे और समस्याएं ठंडे बस्ते में चली गई हैं।
एसोसिएशन के लोगों को डर है कि कहीं ऐसा न हो कि दूसरे मुद्दे उठाएं तो काडर रिव्यू का मामला लंबे समय के लिए लटक जाए।
अब हाथ मलने के सिवा कर भी क्या सकते हैं। मुखिया के इस चारे ने एसोसिएशन को बेचारा जो बना दिया है।