अंबेडकरनगर। भीषण गर्मी के बीच अघोषित विद्युत कटौती से उपभोक्ताओं में त्राहि-त्राहि मची है। सबसे अधिक मुश्किलें रात्रिकालीन कटौती के चलते लोगों को उठानी पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्र की बाज दूर, जिला मुख्यालय को ही रोस्टर के अनुसार बिजली नहीं मिल रही। 24 घंटे के रोस्टर के सापेक्ष बमुश्किल 17 घंटे, तो ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे के सापेक्ष 10 घंटे की ही बिजली उपभोक्ताओं को मिल रही। इससे भीषण गर्मी में उन्हें विभिन्न प्रकार की मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं।
विद्युत उपभोक्ताओं की बदतर विद्युत आपूर्ति को लेकर मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। रोस्टर के अनुसार बिजली मिलना दूर, जो बिजली मिल भी रही है, उसमें भी बार-बार की ट्रिपिंग हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्र की बात दूर जिला मुख्यालय को ही रोस्टर के अनुसार बिजली नहीं मिल रही। रोस्टर के अनुसार जिला मुख्यालय को 24 घंटे बिजली उपलब्ध होनी चाहिए।
आलम यह है कि बमुश्किल 17 घंटे की ही बिजली उपभोक्ताओं को मिल रही। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्र को 18 घंटे का रोस्टर है, लेकिन बमुश्किल 10 घंटे ही मिल रही है।
इसमें भी बार बार की ट्रिपिंग होती रहती है। सबसे अधिक मुश्किल रात्रिकालीन अघोषित कटौती से उपभोक्ताओं को हो रही है।
शुक्रवार को भी रात्रि में कई बार बिजली की आवाजाही हुई। शनिवार दिन में भी तीन चरणों में बिजली की कटौती हुई। इससे उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार की मुश्किलें भीषण गर्मी में उठानी पड़ रही हैं।
उपभोक्ता शहाब परवेज व नरेंद्र जायसवाल ने कहा कि उपभोक्ताओं को सुचारु रूप से बिजली उपलब्ध हो सके, इसके लिए पॉवर कॉरपोरेशन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए। यदि समय रहते जर्जर हो चुके उपकरणों व ओवरलोडेड चल रहे ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ा दी जाती, तो शायद इस प्रकर की मश्किलें न उठानी पड़तीं।
अनुराग श्रीवास्तव व नीलेश कुमार ने कहा कि सिर्फ बिजली दरों में ही वृद्धि की जा रही है। उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली मिल सके, इसके लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। भीषण गर्मी में अघोषित विद्युत कटौती से विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
अधिशाषी अभियंता वीके पटेल का कहना है कि जो बिजली ऊपर से मिल रही, उसे सुचारु रूप से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि कहीं कोई गड़बड़ी होती है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाता है।