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उधार की बिजली भी नहीं दे पा रहे सीएम

Thu, 12 Jun 2014 12:59 PM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अखिलेश सरकार दूसरे राज्यों से बैंकिंग के जरिये बिजली उधार ले रही है लेकिन इसमें भी समस्याएं कम नहीं है।
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सबसे ज्यादा समस्या ट्रांसमिशन कॉरीडोर की आ रही है। ट्रांसमिशन कॉरीडोर न मिलने की वजह से दूसरे राज्यों से खरीदी गई बिजली प्रदेश तक नहीं पहुंच पा रही है।

पश्चिमी क्षेत्र से खरीदी गई लगभग 1000 मेगावाट बिजली के लिए ट्रांसमिशन कॉरीडोर अभी तक नहीं मिल पा रहा है जबकि पूर्वी क्षेत्र से खरीदी गई 200 मेगावाट बिजली के लिए कॉरीडोर 15 जून से उपलब्ध होने की संभावना है।
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कई राज्यों से ली जा रही है बिजली

अधिकारियों का दावा है कि प्रदेश में जितनी बिजली की जरूरत है उतने का इंतजाम भी किया जा रहा है लेकिन आपूर्ति सामान्य रखने में ब्रेकडाउन बड़ी बाधा बन रहे हैं।

शक्ति भवन स्थित नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं के अनुसार बेतहाशा गर्मी के चलते प्रदेश में बिजली की मांग 14000 मेगावाट के आसपास बनी हुई है जबकि अधिकतम उपलब्धता 12,500 मेगावाट तक है।

प्रदेश में बिजली की कमी को पूरा करने के लिए बैंकिंग के जरिये राजस्थान से 100 मेगावाट, हिमाचल प्रदेश से 150 मेगावाट, जम्मू-कश्मीर से 100 मेगावाट तथा दिल्ली से 50 मेगावाट बिजली ली जा रही है।

एनर्जी एक्सचेंज से मिल रही बिजली महंगी

इसके अलावा एनर्जी एक्सचेंज से भी आवश्यकतानुसार बिजली खरीदी जा रही है।

चूंकि एक्सचेंज में बिजली की कीमत पांच रुपये यूनिट से ऊपर पहुंच गई है इसलिए वहां से बहुत ज्यादा बिजली खरीदने के बजाय ऐसे स्रोत तलाशे जा रहे हैं जहां से सस्ती बिजली उपलब्ध हो सकती है।

अभियंताओं का कहना है कि गर्मी में बिजली किल्लत की आशंका को देखते हुए जनवरी-फरवरी में ही पश्चिमी क्षेत्र से अतिरिक्त बिजली खरीदने का करार कर लिया गया था लेकिन अब समस्या ट्रांसमिशन कॉरीडोर की खड़ी हो गई है।

बिजली होते हुए भी प्रदेश तक नहीं पहुंच पा रही है।

केंद्र से नहीं मिली मदद

केंद्र से कई बार कॉरीडोर मुहैया कराने का अनुरोध भी किया गया लेकिन कुछ नहीं हुआ। दो दिन पहले पूर्वी क्षेत्र से 200 मेगावाट बिजली खरीदने का करार हुआ है।

इसके लिए अभी कॉरीडोर नहीं मिल पा रहा है। 15 जून से यह बिजली प्रदेश को मिलने की उम्मीद है।

अभियंताओं के अनुसार न तो बिजली खरीदने में किसी तरह की कोताही बरती जा रही है और न ही इसमें किसी तरह की कोई बाधा है। समस्या नेटवर्क की है।

ट्रांसमिशन नेटवर्क ओवरलोड होने की वजह से जहां प्रदेश को पूरी बिजली नहीं मिल पा रही है वहीं जर्जर वितरण नेटवर्क लोगों तक बिजली पहुंचने में बाधा बना हुआ है। राजधानी समेत पूरे प्रदेश में बिजली संकट की बड़ी वजह ब्रेकडाउन ही हैं।
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उपलब्‍धता में हुई बढ़त

इस मसले पर पावर कार्पोरेशन के एमडी ए पी मिश्रा का कहना है कि ‘बिजली की उपलब्धता में बढ़ोतरी हुई है। बीते 24 घंटे के दौरान प्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रही है। प्रदेश में बिजली की प्रतिबंधित मांग (रोस्टर के अनुसार) 284.5 मिलियन यूनिट है जबकि उपलब्धता 284.2 यूनिट है।

आवश्यकतानुसार अतिरिक्त बिजली का इंतजाम किया जा रहा है। सभी जगह शिड्यूल के अनुसार ही आपूर्ति की जा रही है।

स्थानीय गड़बड़ियों के चलते कहीं थोड़ी-बहुत आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ब्रेकडाउन ठीक कराने के लिए फील्ड के अधिकारियों को युद्धस्तर पर कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।’
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