उपभोक्ताओं को समय पर सही बिजली बिल मुहैया न कराने और अनुबंध की शर्तों को पूरा न करने वाली बिलिंग एजेंसियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बिलिंग एजेंसियों की मनमानी पर आंखें मूंदे रहा पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ऊर्जा मंत्री की नाराजगी और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद हरकत में आया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में हुए करार के तहत बिलिंग एजेंसियों को एक साल के भीतर शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 97 फीसदी उपभोक्ताओं के ऑनलाइन बिल जनरेट करने थे। जिससे ये बिल डाउनलोड किए जा सकें। मगर तय समयसीमा खत्म होने के बावजूद ऐसे बिल 11 फीसदी से भी कम हैं। कई बार हिदायत दिए जाने के बाद जब पावर कॉर्पोरेशन ने कोई कदम नहीं उठाया तो ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर इसकी जांच एसटीएफ से कराने का अनुरोध किया।
अब पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने सभी बिजली कंपनियों से बिलिंग एजेंसियों के साथ हुए करार और उसके क्रियान्वयन का ब्योरा तलब किया है। सूत्रों का कहना है कि अनुबंध की शर्तें पूरा न करने वाली बिलिंग एजेंसियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इन एजेंसियों को जल्द नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं, कुछ एजेंसियों का करार भी रद्द किया जा सकता है।