शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह के साथ बताया कि आलू-प्याज को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर कर दिए जाने से अब व्यापारी कितनी भी मात्रा स्टॉक कर सकते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकती है। इसलिए शासन से दाम नियंत्रण के लिए बार-बार निर्देश जाने के बावजूद जिला प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
ज्यादा भंडारण क्षमता से व्यापारियों की चांदी जानकारों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष में प्रदेश में 100 कोल्ड स्टोरेज बढ़े हैं। भंडारण क्षमता ज्यादा होने से व्यापारियों के सामने पुराना आलू कोल्ड स्टोरेज से निकालने की समस्या नहीं है। नया आलू आने के बाद पुराने आलू के साथ उसे भी भंडारित करने के लिए पर्याप्त स्थान है। पंजाब और प. बंगाल को भी बड़े पैमाने पर आलू निर्यात किया जा रहा है।
हाथरस के आलू उत्पादक डॉ. अनिल चौधरी कहते हैं कि अभी किसान भी बीज के लिए आलू खरीद रहा है। सारा आलू व्यापारियों के हाथ में है, इसलिए किसानों और आम ग्राहकों, दोनों को आलू महंगा मिल रहा है। जैसे ही किसान के पास अपना आलू बिक्री के लिए होगा, इसके दाम गिरा दिए जाएंगे। शाहजहांपुर के प्रगतिशील किसान पंकज कहते हैं कि जमाखोरी के कारण दाम तेजी से चढ़ रहे हैं। यह न किसान के हित में है और न आम ग्राहकों के।
प्याज के दाम में कमी के लिए करना होगा इंतजार
उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यूपी में हर साल 12-13 लाख मीट्रिक टन प्याज की खपत होती है और उत्पादन बमुश्किल 3-4 लाख मीट्रिक टन ही होता है। महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश से नई प्याज आने के बाद दाम नीचे आने की पूरी संभावना है।