गर्भवती महिलाओं में पोस्टपार्टम साइकोसिस यानी प्रसव के बाद डिप्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसकी चपेट में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाएं ही अधिक होती हैं। क्वीन मेरी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता देव ने बताया कि एक्लैंप्सिया (झटके आने की समस्या) की 10 से 15 प्रतिशत प्रसूताओं को पोस्टपार्टम साइकोसिस की समस्या आ रही है।
उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप की समस्या हो जाती है। जिन्हें पहले से ही हाई ब्लडप्रेशर की समस्या होती है, गर्भावस्था में उनका ब्लडप्रेशर अनियंत्रित हो जाता है। ऐसे में बेहोशी और गर्भावस्था के अंतिम दिनों में झटके आने की समस्या होने लगती है, जिसे एक्लैंप्सिया कहते हैं।
हाई ब्लडप्रेशर, हाइपरटेंशन व झटके आने की समस्याओं से गर्भवती की मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। प्रसव के बाद वो पागलों जैसा बर्ताव करने लगती है। वे खुद के साथ नवजात को भी गंभीर नुकसान पहुंचा लेती हैं। पोस्टपार्टम साइकोसिस में डिप्रेशन के चलते आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।