सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में 290 प्राचार्य भर्ती किए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को भेज दिया है। प्रदेश के 331 सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में प्राचार्य के 305 और सहायक प्रोफेसर के करीब 4000 पद खाली हैं। आयोग नए नियमों के तहत जल्द ही भर्ती का विज्ञापन जारी करेगा।
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में वर्ष 2003 से सैकड़ों की संख्या में भर्तियां लंबित होने से सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था चरमराई हुई थी। योगी सरकार ने फरवरी 2018 में आयोग का पुनर्गठन किया। आयोग ने सहायक प्रोफेसर की लंबित भर्तियों को चयन के कगार तक पहुंचा कर रोजगार एक्सप्रेस को रफ्तार दी है।
आयोग के सदस्य एसके पांडेय ने बताया कि आयोग के इतिहास में पहली बार सफलतापूर्वक लिखित परीक्षा आयोजित की गई। 36 विषयों के 1150 पदों के लिए परीक्षा के दो चरण पूरे हो गए हैं। 24 विषयों के 452 पदों के लिए 12 दिसंबर 2018 को हुई लिखित परीक्षा में 15129 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, इनमें से 63 प्रतिशत ने परीक्षा दी।
दूसरे चरण में 5 जनवरी को 6 विषयों के 313 पदों के लिए हुई परीक्षा में 16968 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, 64 प्रतिशत ने परीक्षा दी। तीसरे चरण की परीक्षा 12 जनवरी को है। इसमें 6 विषयों 445 पदों के लिए 17260 पात्र अभ्यर्थी हैं।
853 सहायक प्रोफेसरों का किया चयन
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18 विषयों के सहायक प्रोफेसर के 138 पदों के लिए 2003 में निकली रिक्तियों का साक्षात्कार 2005-06 से लंबित था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर आयोग ने रोस्टर लागू करते हुए एससी-एसटी के 73 और पिछड़ा वर्ग के 65 अभ्यर्थियों का चयन कर परिणाम घोषित किया।
2014 में निकली शिक्षाशास्त्र, संस्कृत, अंग्रेजी, चित्रकला, हिंदी, अर्थशास्त्र, प्राणिशास्त्र, रसायन विज्ञान और भौतिकी विज्ञान विषय के सहायक प्रोफेसरों की भर्ती भी लंबित थी। आयोग ने 7 मई से 24 अगस्त 2018 तक साक्षात्कार लेकर एसी-एसटी के 94, ओबीसी के 134, और सामान्य वर्ग के 487 अभ्यर्थियों का चयन किया है।
डेढ़ दशक से लंबित चल रही भर्तियां पूरी की गई हैं। हमारा प्रयास है कि हाल ही हुई लिखित परीक्षा की भी चयन प्रक्रिया मई से पहले पूरी कर ली जाए। - ईश्वर शरण वर्मा, अध्यक्ष, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग