लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में पीएमएस संवर्ग के डॉक्टरों ने फोरेंसिक विशेषज्ञों से पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। राज्यपाल, डीएम व अन्य अफसरों को भेजे पत्र में कहा गया कि केजीएमयू, लोहिया जैसे चिकित्सा संस्थानों में फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों से पोस्टमार्टम करवाया जाए।
सिविल, लोकबंधु, आरएसएम, बीआरडी महानगर, ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय, बलरामपुर अस्पताल में पीएमएस संवर्ग के डॉक्टर हैं। इनका कहना है कि शासनादेश के अनुसार पोस्टमार्टम राजकीय निजी मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों से कराया जाना चाहिए। निजी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सिर्फ लावारिस शव का पोस्टमार्टम कर सकते हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों को इनका पोस्टमार्टम करना था, लेकिन सारी जिम्मेदारी राजकीय अस्पतालों के नियमित डॉक्टर निभा रहे हैं।
केजीएमयू और लोहिया संस्थान में नियमित डॉक्टर, सीनियर रेजीडेंट व फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के जूनियर रेजिडेंट हैं, जो इस विधा के विशेषज्ञ हैं। इनकी निगरानी में पोस्टमार्टम होता है तो न्यायायिक कार्यों व मेडिकोलीगल प्रक्रिया में अड़चन नहीं आएगी।
इन रेजिडेंट के काम न करने से प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के डॉक्टरों की ही पोस्टमार्टम में ड्यूटी लगाई जा रही है। इन डॉक्टरों के पास विशेषज्ञता न होने से पोस्टमार्टम में त्रुटियां होने पर दबाव पड़ता है। साथ ही पोस्टमार्टम में ड्यूटी लगने से ओपीडी व ओटी का काम प्रभावित होता है।