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सियासी गलियारों में मंत्रियों के भविष्य को लेकर चर्चा शुरू, कौन लेगा इन चेहरों की जगह

Wed, 22 May 2019 12:56 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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लोकसभा चुनाव के नतीजे अभी आए नहीं है लेकिन उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भविष्य के मंत्रियों पर चर्चा शुरू हो गई है। भले ही कुछ एग्जिट पोल उत्तर प्रदेश में भाजपा को कम सीटें मिलने का अनुमान जता रहे हों लेकिन लोग मानकर चल रहे हैं कि केंद्र में सरकार भाजपा की ही बनेगी।

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भले ही 2014 की तुलना में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटें कुछ कम रहें। कौन पास होगा और कौन फेल? चर्चा इस पर कम, यह ज्यादा हो रही है कि उत्तर प्रदेश को इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में कितनी भागीदारी मिलेगी। प्रदेश से केंद्रीय मंत्रिमंडल में इस समय मंत्री पद संभालने वालों में किन-किन चेहरों को दोबारा केंद्रीय मंत्री बनने का मौका मिलेगा।

दरअसल, पिछली बार उत्तर प्रदेश से भाजपा को गठबंधन सहित (71 भाजपा  व 2 अपना दल) 73 सीटों पर जीत मिली थी। प्रदेश से मिली सबसे बड़ी जीत के एवज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी से सबसे ज्यादा आठ लोगों को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया था। इसके अलावा वह खुद भी वाराणसी से सांसद होने के नाते उत्तर प्रदेश का ही प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
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इस तरह यह संख्या नौ थी। बाद में यह संख्या बढ़कर प्रधानमंत्री सहित 15 हो गई थी। बीच में कलराज मिश्र, डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय और डॉ. संजीव बालियान ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। इनकी जगह प्रदेश से डॉ. सत्यपाल सिंह और शिवप्रताप शुक्ल को शामिल किया गया था। केंद्रीय मंत्रिमंडल में अभी प्रधानमंत्री सहित यूपी से 13 सदस्यों का प्रतिनिधित्व है।

ये चेहरे इस बार नहीं

केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य रहे कलराज मिश्र, उमा भारती और कृष्णा राज इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। जाहिर है कि ये चेहरे इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में नहीं दिखेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से लड़ रहे हैं। अन्य मंत्रियों में राजनाथ सिंह लखनऊ, मेनका गांधी सुल्तानपुर, डॉ. महेश शर्मा नोएडा, मनोज सिन्हा गाजीपुर, संतोष गंगवार बरेली, साध्वी निरंजन ज्योति फतेहपुर, अनुप्रिया सिंह पटेल मिर्जापुर, डॉ. सत्यपाल सिंह बागपत से चुनाव लड़ रहे हैं। डॉ. संजीव बालियान मुजफ्फरनगर से किस्मत आजमा रहे हैं।

इनमें से कुछ की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। बाकी को लेकर कयासों के दौर जारी हैं। यह तय ही है कि राजनाथ इस बार भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण भूमिका में होंगे। शेष को लेकर चर्चा है कि यदि मेनका गांधी, मनोज सिन्हा, संतोष गंगवार और साध्वी निरंजन ज्योति चुनाव जीत जाते हैं तो इन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है।

चुनाव जीतने पर डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय को फिर केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है और प्रदेश संगठन की बागडोर किसी अन्य नेता को सौंपी जा सकती है।
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इन समीकरणों की चर्चा

यह भी कहा जा रहा है कि भले ही केंद्र में भाजपा सरकार बन जाए लेकिन यदि उत्तर प्रदेश में सीटें घटीं तो इसका असर सरकार से लेकर संगठन में फेरबदल के रूप में सामने आएगा। गठबंधन के गणित और उसके प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह निश्चित रूप से 2022 के मद्देनजर समीकरणों को दुरुस्त करने की कोशिश करेंगे।

मोदी अपने मंत्रिमंडल के जरिये भी प्रदेश की सियासी लड़ाई को 60 बनाम 40 बनाने की कोशिश करेंगे। इसके लिए मंत्रिमंडल में प्रदेश से पहले की तुलना में अनुसूचित जाति के सदस्यों की हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं। साथ ही उम्रदराज लोगों के बजाय युवा चेहरों को मौका दे सकते हैं ताकि गठबंधन की चुनौतियों को देखते हुए सियासी सक्रियता बढ़ाई जा सके।
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