केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य रहे कलराज मिश्र, उमा भारती और कृष्णा राज इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। जाहिर है कि ये चेहरे इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में नहीं दिखेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से लड़ रहे हैं। अन्य मंत्रियों में राजनाथ सिंह लखनऊ, मेनका गांधी सुल्तानपुर, डॉ. महेश शर्मा नोएडा, मनोज सिन्हा गाजीपुर, संतोष गंगवार बरेली, साध्वी निरंजन ज्योति फतेहपुर, अनुप्रिया सिंह पटेल मिर्जापुर, डॉ. सत्यपाल सिंह बागपत से चुनाव लड़ रहे हैं। डॉ. संजीव बालियान मुजफ्फरनगर से किस्मत आजमा रहे हैं।
इनमें से कुछ की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। बाकी को लेकर कयासों के दौर जारी हैं। यह तय ही है कि राजनाथ इस बार भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण भूमिका में होंगे। शेष को लेकर चर्चा है कि यदि मेनका गांधी, मनोज सिन्हा, संतोष गंगवार और साध्वी निरंजन ज्योति चुनाव जीत जाते हैं तो इन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है।
चुनाव जीतने पर डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय को फिर केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है और प्रदेश संगठन की बागडोर किसी अन्य नेता को सौंपी जा सकती है।
यह भी कहा जा रहा है कि भले ही केंद्र में भाजपा सरकार बन जाए लेकिन यदि उत्तर प्रदेश में सीटें घटीं तो इसका असर सरकार से लेकर संगठन में फेरबदल के रूप में सामने आएगा। गठबंधन के गणित और उसके प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह निश्चित रूप से 2022 के मद्देनजर समीकरणों को दुरुस्त करने की कोशिश करेंगे।
मोदी अपने मंत्रिमंडल के जरिये भी प्रदेश की सियासी लड़ाई को 60 बनाम 40 बनाने की कोशिश करेंगे। इसके लिए मंत्रिमंडल में प्रदेश से पहले की तुलना में अनुसूचित जाति के सदस्यों की हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं। साथ ही उम्रदराज लोगों के बजाय युवा चेहरों को मौका दे सकते हैं ताकि गठबंधन की चुनौतियों को देखते हुए सियासी सक्रियता बढ़ाई जा सके।