सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली में चौधरी अजित सिंह से मिलकर उन्हें पांच नवंबर को सपा के रजत जयंती समारोह में शामिल होने का न्यौता दिया। दोनों नेताओं के बीच विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर प्रारंभिक चर्चा भी हुई।
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उन्होंने डॉ. लोहिया और चौधरी चरण सिंह के अनुयायियों की एकजुटता की अपील दोहराकर भविष्य में दोस्ती के संकेत दे दिए हैं। माना जा रहा है कि सपा का घमासान थमा तो दोनों दलों की दोस्ती एक बार फिर परवान चढ़ सकती है।
हालांकि चौधरी अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी ने कहा कि महागठबंधन अभी दूर की कौड़ी है। शिवपाल ने रालोद अध्यक्ष को सपा के रजत जयंती समारोह में शामिल होने का न्यौता दिया है।
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सपा और रालोद पहले भी गठबंधन करके चुनाव लड़ चुके हैं। वर्ष-2004 में बनी मुलायम सरकार में रालोद शामिल था। पिछले महीने अजित ने डॉ. लोहिया व चरण सिंह के अनुयायियों से एक साथ आने की अपील की तो शिवपाल ने दो कदम आगे बढ़कर गांधीवादियों को भी इसमें शामिल कर लिया।
अजित ने दिए गठबंधन के संकेत
शुक्रवार को शिवपाल ने अजित से उनके निवास पर जाकर मुलाकात की। बाद में दोनों नेताओं ने भाजपा को रोकने के लिए गठबंधन के संकेत भी दिए।
हालांकि, उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कोई बात नहीं हुई है। अजित ने कहा, पांच नवंबर को सपा के रजत जयंती समारोह का निमंत्रण जरूर मिला है, लेकिन माना जा रहा है कि अजित ने परिवार के विवाद पर भी उनसे चर्चा की।
पीके से बातचीत, कांग्रेस से नजदीकियों की चर्चा
दिल्ली दौरे में शिवपाल की कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) से भी प्रदेश के चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चा हुई है। दोनों की मुलाकात जद यू प्रमुख महासचिव केसी त्यागी के आवास पर हई।
यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि 25 अक्तूबर को जद यू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव सोनिया गांधी से मिले थे और 27 अक्तूबर को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद शरद से मिलने उनके आवास पर गए थे।
27 अक्तूबर को ही शिवपाल की भी शरद यादव से बातचीत हुई है। सारे घटनाक्रम को जोड़कर देखा जाए तो कांग्रेस की नजर सपा के पल-पल के घटनाक्रम पर है।
सियासी मजबूरी है गठबंधन
प्रदेश के मौजूदा हालात में सियासी गठबंधन मजबूरी हो गया है। लोकसभा चुनाव में मात्र पांच सीटों तक सीमित रही सपा को विवादों के साये से नुकसान हुआ है। जबकि, पिछले चुनाव में रालोद का जानाधार बिखर चुका है।
अकेले दम पर लड़कर रालोद ज्यादा कामयाबी तो हासिल नहीं कर पाएगा, लेकिन दूसरे दलों के उम्मीदवारों को हराने में उसकी भूमिका हो सकती है।
अजित पहले ही कह चुके हैं कि भाजपा के अलावा किसी भी दल से गठबंधन हो सकता है। फिलहाल, रालोद, जद यू और बीएस-4 के आरके चौधरी के साथ कई संयुक्त रैलियों की तैयारी है। सपा से गठबंधन पर पश्चिमी यूपी में दोनों ही दलों को लाभ मिल सकता है।
जिन दलों को 2017 के विधानसभा चुनाव में एक साथ लाने की तैयारी चल रही है, उनमें मुलायम परिवार के विवाद को लेकर चिंता है।
उनका कहना है कि सपा में बंटवारे की स्थिति का सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा। जद यू के केसी त्यागी ने उम्मीद जताई है कि मुलायम अपने परिवार के मतभेदों को जल्द दूर कर लेंगे।
कांग्रेस की रणनीति पर नजरें
कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर की शिवपाल यादव से मुलाकात के मायने निकाले जा रहे हैं। पीके 27 साल से सत्ता से बेदखल कांग्रेस को खड़ा करने की कोशिश में जुटे हैं। कांग्रेस को कितना चुनावी लाभ मिलेगा, यह कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन पीके ने कांग्रेस को चर्चा में जरूर ला दिया है।
तमाम कसरतों के बावजूद कांग्रेस नेता अकेले चुनाव मैदान में उतरने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसी स्थिति में कांग्रेस बिहार की तरह यूपी में भी महागठबंधन में जा सकती है।