अंबेडकरनगर निवासी 60 वर्षीय मोहम्मद रईस किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। पहले लोहिया संस्थान में भर्ती थे। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें एंबुलेंस से केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। भर्ती के लिए काफी देर तक जद्दोजहद चलती रही। इस दौरान रईस एंबुलेंस में ही तड़पते रहे। परिजन समय पर भर्ती कर इलाज शुरू करने का आग्रह करते दिखे। तेज धूप में एंबुलेंस के भीतर मरीज का इंतजार करना ट्रॉमा सेंटर का आम दृश्य बन चुका है।
केस - 3: नहीं मिली व्हीलचेयर, धूप में स्ट्रेचर पर पड़ी रहीं शिव देवी
बुद्धेश्वर से आईं शिव देवी का केजीएमयू में डायबिटिक फुट का इलाज चल रहा है। उनके दाहिने पैर में गंभीर सूजन है और पूरा पैर पट्टी से बंधा था। कुछ जांचों के लिए उन्हें ट्रॉमा इमरजेंसी भेजा गया लेकिन अंदर ले जाने के लिए व्हीलचेयर नहीं मिली। परिजन काफी देर तक इधर-उधर भटकते रहे। इस दौरान शिव देवी दोपहर की तेज धूप में स्ट्रेचर पर ही पड़ी रहीं। उनकी हालत इतनी खराब थी कि वह लगभग अचेत नजर आईं। परिजन बार-बार व्हीलचेयर उपलब्ध कराने की गुहार लगाते रहे लेकिन तत्काल मदद नहीं मिल सकी।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि जहां तक सर्जरी के लिए तीन महीने की वेटिंग की बात है तो केजीएमयू में मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। डिमांड और सप्लाई में गैप की वजह से मरीजों को सर्जरी आदि के लिए बाद की तरीखें देनी पड़ रही हैं। सभी ओटी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। मरीज को व्हीलचेयर न मिलने और काफी देर तक स्ट्रेचर पर रहने की जांच कराई जाएगी।