पर्यावरण के लिए खतरा बने पॉलीथिन की थैलियों (कैरी बैग) के इस्तेमाल पर सूबे में बृहस्पतिवार से प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब इसका इस्तेमाल, निर्माण, स्टोर, बेचना, बाहर से मंगाना अपराध माना जाएगा।
इसके उल्लंघन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 की धारा 19 के तहत पांच साल की सजा या एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों लगाया जा सकता है।
शासन ने साफ किया है कि यह प्रतिबंध फैक्ट्री से निकलने वाले दूध के सीलबंद पैकेट्स समेत उन थैलियों पर लागू नहीं होगा, जो पैकेजिंग का हिस्सा हैं।
प्रतिबंध को लागू करने की जिम्मेदारी जिला पर्यावरण समितियों के अध्यक्ष यानी जिलाधिकारियों और उनके मातहत काम करने वाले उप जिलाधिकारियों को दी गई है।
राज्य सरकार ने दिया था 30 दिन का समय
राज्य सरकार ने 22 दिसंबर को पॉलीथिन के कैरी बैग पर पाबंदी की अधिसूचना जारी करते हुए 30 दिन का समय दिया था। यह बुधवार को पूरा हो गया।
विभिन्न उद्यमी संगठनों के साथ हुई बातचीत के बाद बुधवार शाम प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण संजीव सरन ने शासनादेश जारी करके प्रतिबंध के संबंध में एक बार फिर स्थिति स्पष्ट की।
कैरीबैग मतलब क्या
पॉलीथिन की थैलियों से मतलब है वस्तुओं को लाने-ले जाने वाली प्लास्टिक सामग्री से निर्मित किसी प्रकार की थैली से है। इसमें वे थैलियां शामिल नहीं हैं, जो पैकेजिंग का भाग या हिस्सा हैं, जिसमें इस्तेमाल से पहले वस्तुएं सीलबंद की जाती हैं।
हाईकोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखेगी राज्य सरकार
पॉलीथिन पर प्रतिबंध के खिलाफ कुछ उद्यमियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में सुनवाई 3 फरवरी को होगी। हाईकोर्ट में शासन अपना पक्ष मजबूती से रखेगा। इसके लिए पॉलीथिन के इस्तेमाल से अब तक सामने आ चुके दुष्प्रभावों पर रिपोर्ट भी तैयार करवाई जा रही है।
प्रतिबंध लागू कराने की जिम्मेदारी इन अफसरों पर
पॉलीथिन पर पाबंदी की अधिसूचना लागू करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव की होगी।
बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता स्तर के अधिकारी, निदेशक पर्यावरण व उनके सहायक निदेशक स्तर के अधिकारी, उप मंडल मजिस्ट्रेट, स्थानीय निकाय व छावनी परिषद के सफाई और खाद्य निरीक्षक व उनसे ऊपर के अधिकारी, विपणन एवं आपूर्ति अधिकारी, निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की ओर से नामित चिकित्सा अधिकारी, श्रम निरीक्षक व उनसे ऊपर के अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी व उनसे ऊपर के अधिकारी को भी अधिसूचना के पालन करवाने की जिम्मेदारी दी गई है।