लखनऊ। वीआईपी रोड स्थित बुद्धविहार शांति उपवन में चल रहे पालि साहित्य सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को बौद्ध धर्म पर आधारित 50 से अधिक शोधपत्रों की प्रस्तुति हुई।
पालि साहित्य के वरिष्ठ आचार्य प्रो. उमाशंकर व्यास ने कहा कि केंद्र सरकार ने पालि को क्लासिकल लैंग्वेज का दर्जा देकर पुनर्जीवित किया है। अब जरूरी है कि कक्षा छह से स्कूली शिक्षा में इसका समावेश किया जाए। उन्होंने देश के विश्वविद्यालयों में पालि विभागों और विशिष्ट अध्ययन केंद्रों की स्थापना की मांग उठाई।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष हरिगोविंद बौद्ध ने बताया कि दूसरे दिन पांच सत्रों का आयोजन हुआ। इनमें पालि भाषा एवं साहित्य और बौद्ध अध्ययन से संबंधित विविध विषयों पर शोधपत्र एवं वक्तव्य प्रस्तुत किए गए। शोधपत्रों में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं व भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में पालि साहित्य पर शोधपत्र साझा किए गए। सम्मेलन में पालि पुस्तक मेला, पेंटिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण के केंद्र रहे।