लखनऊ। लॉकडाउन ने भले ही राजधानी की हवा सुधारी हो, लेकिन बीते साल की तुलना में कम सख्ती पर इसमें प्रदूषण बढ़ा भी है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) की रिपोर्ट मुताबिक पिछले साल की प्री-मानसून रिपोर्ट की तुलना में प्रदूषण बढ़ा है। आवासीय इलाकों में गोमतीनगर और व्यावसायिक इलाकों में चारबाग में सबसे अधिक वायु प्रदूषण रहा।
आईआईटीआर के निदेशक डॉ. एसके बारिक ने विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर डिजिटल संस्करण पूर्व मानसून रिपोर्ट-2021 रिलीज किया। इसके मुताबिक अप्रैल और मई में नौ लोकेशन पर हवा के नमूने टीम ने लिए। इसमें पाया गया कि आम दिनों की तुलना में प्रदूषण भले कम हो, लेकिन अब भी पीएम2.5 और पीएम10 के आंकड़े राष्ट्रीय मानक से अधिक हैं।
राजधानी में पीएम 2.5 का औसत अलग-अलग इलाकों में 60.7 से 71.1 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और पीएम 10 की वैल्यू 109.8 से 152.5 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर मिली है। पीएम 2.5 के लिए मानक 80 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और पीएम10 के लिए 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है। हवा में हानिकारक गैसें जैसे सल्फर डाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड मानक से कम मिली हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की तुलना में पीएम2.5 की वैल्यू 16.57 प्रतिशत और पीएम10 की वैल्यू 26.1 प्रतिशत बढ़ी मिली है। वाहन अधिक चले तो सल्फर डाई ऑक्साइड की वैल्यू 113.90 प्रतिशत बढ़ी है। नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की वैल्यू में भी 23.13 प्रतिशत का इजाफा हुआ। वैज्ञानिक भी इसका कारण 2020 में संपूर्ण लॉकडाउन होना मान रहे हैं। पिछली बार की तुलना में वाहनों की आवाजाही जहां ज्यादा रही तो औद्योगिक इकाई और निर्माण के काम चालू रहे।
इस तरह मिला हवा में प्रदूषण
इलाके पीएम10 पीएम2.5
आवासीय
अलीगंज 111.9 60.7
विकासनगर 117.3 62.5
इंदिरानगर 124.5 67.6
गोमतीनगर 128.7 68.2
व्यावसायिक
चारबाग 143.8 71.1
आलमबाग 133.9 64.5
अमीनाबाद 109.8 62.0
चौक 121.3 62.5
औद्योगिक
अमौसी 152.5 61.5
(आंकड़े 24 घंटे के औसत के रूप में माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर यूनिट में)
चार साल से लगातार कम हुआ प्रदूषण
रिपोर्ट में कहा गया कि 2017 से लगातार वायु प्रदूषण में गिरावट देखने में मिल रही है। 2020 और 2021 में प्री-मानसून रिपोर्ट में यह अंतर काफी रहा है। इसकी संभावना यह भी है कि लॉकडाउन से कम से कम समय के लिए प्रदूषण फैलाने वाले कारकों में कमी आई हो। इसके बाद भी यह लोगों के जागरूक होने और हवा के तुलनात्मक रूप से साफ होने का संकेत है।
कोरोना की वजह से कम बिके वाहन
आईआईटीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 2020-21 में पिछले साल की तुलना में वाहन कम बिके हैं। इस साल बीते वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी केवल 4.5 प्रतिशत है। 2019-20 में वाहनों की संख्या में 2018-19 की तुलना में 9.5 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी। लखनऊ में इस समय 25.16 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इस साल सबसे अधिक 22 प्रतिशत बढ़ोतरी टैक्सी कारों की बिक्री में मिली है।
इस टीम ने किया सर्वे
डॉ. जीसी किस्कू, एएच खान, डॉ. बी श्रीकांत, डॉ. डीके पटेल, डॉ. एन मणिक्कम, प्रदीप शुक्ला, सुशील सरोज, प्रिया सक्सेना, अंकित गुप्ता, अंकित कुमार, निर्मेश श्रीवास्तव, हामिद कमाल, अब्दुल अतीक सिद्दीकी, रवि सिंह।
इस तरह से सुधर सकती है हवा की सेहत
- वाहनों से निकलने वाले धुएं को सोखने के लिए सड़क किनारे हरियाली बढ़ाई जाए। यूरो-6 जैसी अनिवार्यता के वाहन चलें।
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिले।
- एसी की जगह प्राकृतिक हवा के उपयोग को बढ़ावा मिले।
- कार्बन उर्त्सजन को कम से कम किया जाए।
- कूड़ा जलाने या खुले में फेंकने पर पूरी तरह रोक हो।