एनएचएआई की सड़क पर धूल बढ़ने पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कारण बताओ नोटिस दिया है। खास बात यह है कि सितंबर में बोर्ड के चेतावनी दिए जाने के बावजूद अब धूल की मात्रा घटने के बजाय बढ़ गई। इस पर बोर्ड ने अभियोजन की कार्यवाही प्रारंभ करने की चेतावनी दी भी है।
नोटिस में कहा गया है कि धूल की मात्रा को लेकर शहीद पथ पर पहली जांच 4 व 5 सितंबर को कराई गई थी। जबकि, दूसरी जांच 29 अक्तूबर व 2 नवंबर को कराई गई। इस अवधि में डस्ट (धूल) की मात्रा 19.14 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
नोटिस में कहा गया है कि आईआईटी, कानपुर के अध्ययन के अनुसार, लखनऊ शहर के प्रदूषण में पीएम-10 का 87 प्रतिशत और पीएम-2.5 का 77 प्रतिशत योगदान रोड डस्ट (सड़क की धूल) के कारण है। इसको देखते हुए एनएचएआई की पीआईयू पूर्वी को 18 सितंबर को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इसमें अमर शहीद पथ लखनऊ पर नियमित रूप से मशीनों से सफाई कराने और जल छिड़काव के लिए भी कहा गया था। जल छिड़काव के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से शुद्धिकृत सीवेज में डस्ट अलग करने वाला पदार्थ भी मिलाने के निर्देश दिए गए थे।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि एनएचएआई को दिए गए निर्देशों के अनुसार सड़कों की समुचित सफाई नहीं की जा रही है। सड़क की धुलाई के लिए ताजे पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो उतना कारगर नहीं है। लखनऊ शहर के एक्यूआई में लगातार वृद्धि हो रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनएचएआई को वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम-1981 की धारा 31ए के तहत नोटिस दिया है कि क्यों न एनएचएआई के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही प्रारंभ कर दी जाए।