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इन बयानों से यूपी मे भाजपा को मिल रही कामयाबी!

Sun, 14 Dec 2014 11:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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‘आजम भी हिंदू हैं। चाहें तो डीएनए टेस्ट करा लें। आजम ही क्यों, देश के तकरीबन सभी इसाइयों व मुस्लिमों के पूर्वज हिंदू ही थे। देश में तलवार के बल पर बड़ी संख्या में हिंदुओं को मुसलमान बनाया गया है।’
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- चंपत राय राष्ट्रीय महासचिव विश्व हिंदू परिषद

‘हमने फैसला किया है कि अगर वे एक हिंदू लड़की का धर्म परिवर्तन करवाते हैं, तो हम सौ मुस्लिम लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराएंगे।’
- महंत आदित्यनाथ (भाजपा सांसद)

‘बाबर किसी का रिश्तेदार नहीं था। बाबर ने अयोध्या में मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया। यहां हम किसी की भी पूजा कर सकते है। अगर उन्होंने (राज्यपाल) व्यक्तिगत तौर पर अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का बात कही है तो गलत क्या है।
- साक्षी महराज...भाजपा सांसद

‘इस देश में रहने वाले सभी लोग राम की संतान हैं। जो लोग इस विचार में विश्वास नहीं रखते वे भारतीय नहीं हैं। उन्हें भारत छोड़ देना चाहिए। यह देश रामजादों का है।...जादों का नहीं।’
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- साध्वी निरंजन ज्योति केंद्र में राज्यमंत्री

जानकार भी कर रहे रणनीति का खुलासा

कुछ ने इन बोलों पर माफी मांग ली है तो कुछ ने सफाई दे दी है। पर, यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि ये बोल अब थम जाएंगे। ये तो भगवा टोली की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगते हैं। संघ परिवार की राजनीति को बारीकी से समझने वालों की मानें तो इनके जरिये रणनीतिकार समाज की नब्ज और इन मुद्दों का करंट देखना चाहते हैं।

जो चल गया या जिससे कुछ मिलने की उम्मीद दिखी, उसे चलाया जाएगा। नहीं तो उसे भविष्य के लिए छोड़ दिया जाएगा। कुल मिलाकर कोशिश ध्रुवीकरण के सहारे ताकत बढ़ाने और समर्थन जुटाने की ही दिखती है।

इसीलिए ‘लविंग जेहाद’ पर सक्रिय होने वाला संघ परिवार घर वापसी बनाम धर्मान्तरण पर भी दो-दो हाथ करने की तैयारी कर रहा है। कोई राम-राम जप रहा है तो कोई मुसलमानों को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के विवादित बयान को आगे बढ़ा रहा है।

विहिप के अन्तरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत रायत आजम खां को हिंदू बता रहे हैं। लविंग जेहाद पर मुखर रहे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी घर वापसी पर भी पीछे नहीं हैं। बीच में वह आगरा के ताजमहल को हिंदू मंदिर बताकर भी विवाद खड़ा कर चुके हैं।

इनकी सफाई भी कह रही सच्चाई

विहिप के धर्म प्रसार समिति के राष्ट्रीय प्रमुख धर्मनारायण हों या संघ के धर्म जागरण विभाग का काम देखने वाले रामलखन। कहते हैं कि यह धर्मान्तरण नहीं धर्म परावर्तन है। धर्मान्तरण तो इस्लाम व ईसाई मतावलंबियों ने कराया था। हम तो घर वापसी करा रहे हैं। धर्मान्तरण पर रोक का कानून बनना चाहिए।

भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर और केंद्र में मानव संसाधन राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया भी कह रहे हैं कि घर वापसी में बुराई नहीं है। उधर, भगवा टोली के संगठन अलग-अलग स्थानों पर हजारों मुसलमानों व ईसाइयों की घर वापसी अर्थात उनके पुन: हिंदू बनने का ऐलान करते घूम रहे हैं।

कोशिश भविष्य के एजेंडे को सेट करने की
संघ परिवार भविष्य के एजेंडे को सेट करना चाहता है। इसीलिए वह नतीजा हासिल करने से ज्यादा ध्यान आम लोगों के बीच इन मुद्दों पर बहस चलाने पर दे रहा है। इससे बिना कुछ किए उसके एजेंडे को धार मिलेगी। साथ ही यूपी में 2017 के विधानसभा के चुनाव के लिए माहौल बनाने में मदद मिलेगी।

नए चेहरों को पहचान दिलाने की कोशिश

जो लोग विवादित बयान से चर्चा में आए हैं, उनमें अधिकतर ऐसे चेहरे हैं जिनका जमीन पर या अपने समाज के बीच बहुत आधार नहीं रहा है। वह चाहे साक्षी महराज हों, साध्वी निरंजन ज्योति हों या भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी।

निषाद समाज से होने के बावजूद साध्वी पिछड़े नेता की पहचान नहीं बना पाई हैं। यही स्थिति साक्षी महराज की है। चंपत राय भी इसी कतार में आते हैं। जाहिर है कि इस तरह के बयानों का मकसद एजेंडा सेट करने के साथ नए चेहरों को पहचान दिलाना भी है।

असल कोशिश यह
विवादित बयान तो बस बहाना भर हैं। भगवा टोली धर्मान्तरण को मुद्दा बनाना चाहती थी। उसकी यह कोशिश दस सालों से चल रही थी। संघ परिवार की हर बैठकों में धर्मान्तरण पर चिंता जताई जाती रही है। अब केंद्र में अनुकूल सरकार होने पर उसने इस विवाद को फिर हवा दे दी।
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भगवा टोली को होगा दोहरा लाभ

इस मुद्दे पर संघ के दोनों हाथ में लड्डू हैं। एक तरफ आगरा में घर वापसी या मुसलमानों के हिंदू बनाने की घटना पर विवाद खड़ा होता है तो दूसरी तरफ संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू इस आश्वासन के साथ सामने आ जाते हैं कि वह धर्मान्तरण पर कानून बनाने को तैयार हैं।

इसीलिए इस मुद्दे पर अब भगवा टोली की तरफ से यह भी कहा जाने लगा है कि केंद्र धर्मान्तरण रोकने को कानून बनाने को तैयार है। विपक्ष को साथ आना चाहिए। सभी को मालूम है कि विपक्ष धर्मान्तरण पर रोक का कानून बनाने का समर्थन नहीं कर सकता क्योंकि इससे उसे सियासी नुकसान हो सकता है।

भगवा टोली भी यही चाहती है। जिससे वह लोगों को बता सके कि भाजपा विरोधी दल वोट बैंक की राजनीति में अब भी हिंदुओं को मुसलमान और ईसाई बनाने की साजिश के समर्थन में खड़े हैं। जाहिर है कि इस स्थिति से फायदा सिर्फ भगवा टोली का ही होना है।
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