अखिलेश यादव की यूपी सरकार में अफसरों ने जो माया रची है, उससे बार-बार खुद सीएम को शर्मिंदा होना पड़ा है।
पार्टी की जो साख गिरी है, वह अलग। मुजफ्फनगर दंगों के बाद से ही ऐसा हो रहा है। पहले प्रमुख सचिव गृह के दफ्तर से राममंदिर की चिट्ठी चली गई।
सॉफ्ट टार्गेट बनी सरकार
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर कानून व्यवस्था नहीं संभाल पाए। अब, नए प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता ने राहत कैंप में हुई बच्चों की मौत को साइबेरिया की ठंड से जोड़कर सरकार को विरोधियों का सॉफ्ट टार्गेट बना दिया है। बसपा ने सबसे पहले हमला बोलते हुए अफसर की इस हरकत पर सूबे के मुखिया अखिलेश से इस्तीफा मांग लिया है।
भाजपा ने भी अखिलेश सरकार के प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता के बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह सरकार की मानसिकता को जाहिर करता है।
यह सरकार की मानसिकता: भाजपा
भाजपा के प्रवक्ता राजीव प्रताप सिंह रूढी ने कहा कि गृह विभाग का कोई अफसर ऐसा बोलता है, तो किसी अफसर का व्यक्तिगत बयान नहीं है, यह मुख्यमंत्री अखिलेश और मुलायम की मानसिकता को जाहिर करता है। भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अफसर वही बोलते हैं, जो सरकार की नीति होती है।
जावड़ेकर ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगा पाडि़तों के शराणार्थियों को लेकर मुलायम सिंह के जैसे बयान आए थे, उसके मद्देनजर प्रमुख सचिव गृह गुप्ता का कोई बयान अलग नहीं है। इससे सरकार की मंशा पूरी तरह साफ हो गई है।