2014 के चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले नरेंद्र मोदी पर हर तरह की बयान बाज़ी हुई। जिसमें कई तो बेहद अपमानजनक और शर्मनाक रहीं।
सिर्फ मोदी ही नहीं एक दूसरे पर आक्षेप लगाने में नेताओं के भाषण और संवाद में किस तरह शालीनता खोई गई और ये कितने निचले स्तर तक पहुंच गए हैं, यह इस लोकसभा चुनाव में खूब देखने को मिला।
चुनाव के पहले जहां टूजी, थ्रीजी, सीडब्ल्यूजी तक का इस्तेमाल होता था, चुनाव की आहट के साथ ही ये जीजाजी, एबीसीडी, आरएसवीपी और इसके फुल फॉर्म तक आ गए।
निजी जीवन पर आरोप
निजी जीवन पर एक-दूसरे पर जितने आरोप-प्रत्यारोप इस चुनाव में लगाए गए, उतने शायद ही पहले कभी लगाए गए होंगे।
कई बातों पर तो एफआईआर तक की नौबत आ गई। वहीं, इस चुनाव में प्रतीक के रूप में जानवरों का भी खूब इस्तेमाल हुआ।
ये चुनाव अपने नतीजों को लेकर किस तरह याद रहेंगे यह तो 16 मई को पता चलेगा लेकिन कुर्सी के लिए जिस तरह की निचले स्तर की राजनीति हुई है, वह लोगों के दिलो-दिमाग में लंबे अर्से तक खदबदाता रहेगा।
चिंताजनक यह भी रहा कि शीर्ष राजनीतिज्ञ भी इस बदजुबानी में पीछे नहीं रहे।
आजम का मोदी पर हमला
बोटी-बोटी-सहारनपुर के सपा प्रत्याशी इमरान मसूद ने नरेंद्र मोदी की बोटी-बोटी करने वाला बयान दिया तो उन पर एफआईआर तक की नौबत आई। उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
कुत्ते का पिल्ला-गुजरात दंगे से जुड़े एक सवाल पर मोदी ने सीधा जवाब न देकर कुत्ते का पिल्ला शब्द प्रयोग किया था। आजम खां ने इसे खूब भुनाया। आजम ने मोदी के लिए कुत्ते का बड़ा भाई शब्द का इस्तेमाल कर डाला। इसके जवाब में मोदी ने कहा-कुत्ता सबसे वफादार होता है...खुशी है, आजम ने मुझमें यह गुण पहचाना।
हनीमून : राहुल गांधी दलितों के घर हनीमून के लिए जाते हैं। अगर उन्होंने किसी दलित लड़की से शादी कर ली होती तो शायद वे पीएम बन गए होते। बाबा रामदेव की इस टिप्पणी को लेकर देश भर में अनेक स्थानों पर उनके खिलाफ एफआईआर हुई।
अमित शाह और आजम का बयान
बदला-भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अमित शाह ने पश्चिमी यूपी में कहा कि यह चुनाव अन्याय करने वालों को सबक सिखाने का वक्त है। अपमान का बदला लिया जाना चाहिए। अब आपको बटन दबाकर ज्यादतियों का जवाब देना है।
आयोग ने ‘बदला’ शब्द का प्रयोग गलत भावना के साथ किया गया पाया। शाह पर एफआईआर हुई, जनसभाएं करने पर प्रतिबंध लगा। बाद में उनकी सफाई पर प्रतिबंध हटाया गया।
कारगिल-अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां ने गाजियाबाद की एक रैली में कहा कि करगिल युद्ध में भारत को मुस्लिम सैनिकों ने जीत दिलाई। जब हम करगिल जीते तब वहां कोई हिंदू सैनिक नहीं था। इस बयान को लेकर आजम के भाषण व रैली पर रोक लगी। एफआईआर दर्ज हुई।
मोदी पर प्रियंका का हमला
नीची राजनीति-नरेंद्र मोदी की अमेठी रैली के बाद प्रियंका वाड्रा ने मोदी के लिए नीची राजनीति करने का आरोप लगाया। इस शब्द पर खूब घमासान हुआ। मामला मोदी की जाति पूछने तक पहुंच गया। बिहार में प्रियंका के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ।
शैतान-पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मोदी शैतान है। उसने अपने राज्य गुजरात में दंगों की अगुवाई की है। अब उसकी नजर पश्चिम बंगाल पर है।
कसाई : तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने मोदी के लिए कहा- बंगाल में गुजरात का कसाई आया है। उनके पास बंगाल के विकास मॉडल का कोई जवाब नहीं है।
भाजपा को वोट पर कमेंट
बिहार भाजपा के नेता गिरिराज सिंह ने कहा कि जो मोदी को वोट न दें, उन्हें पाकिस्तान भेज देना चाहिए। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि जो लोग मोदी को वोट दें उन्हें समुद्र में डुबो देना चाहिए।
56 इंच का सीना-नरेंद्र मोदी ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को यूपी की बदहाली पर घेरते हुए कहा था कि गुजरात की तरह विकास के लिए 56 इंच का सीना होना चाहिए। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जवाब दिया कि मोदी का 56 इंच का सीना नहीं, 56 इंच की तोंद है।
आतंकवादियों का अड्डा: भाजपा के प्रदेश प्रभारी अमित शाह ने आजमगढ़ को आतंकवादियों का अड्डा करार दिया तो जोरदार आलोचना हुई। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आजमगढ़ के भाजपा प्रत्याशी रमाकांत यादव को ही सबसे बड़ा आतंकवादी करार दे दिया।
गुंडा : बेनी प्रसाद वर्मा ने नरेंद्र मोदी को संघ का गुंडा करार दिया। वे कई अन्य अवसरों पर भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते नजर आए।
मायावती पर हमला
क्या कहूं?-सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया। कहा - ...अब श्रीमती कहें या कुंवारी, बेटी या बहन कहें?
डीएनए टेस्ट-महाराष्ट्र के सपा नेता अबू आजमी यहां तक कह गए कि ‘अगर कोई मुसलमान सपा का विरोध करता है तो उसका डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए। वे आरएसएस के हो सकते हैं। सपा को वोट नहीं देने वाले असली मुसलमान नहीं हो सकते।’
वंशवाद-नरेंद्र मोदी ने वंशवाद की राजनीति पर चोट करते हुए केंद्र में जहां राहुल-सोनिया के लिए मां-बेटे की सरकार कहा तो यूपी में मुलायम व अखिलेश के लिए पिता-पुत्र की सरकार।
शिवपाल और अखिलेश के लिए चाचा-भतीजे की सरकार बताते नजर आए। मुख्यमंत्री अखिलेश ने जवाब दिया कि मोदी भी अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाएं, किसने रोका है?
मोदी-राहुल का वार
चौकीदार-मोदी मतदाताओं से खुद को चौकीदार बनाने की अपील करते नजर आए तो राहुल गांधी ने कटाक्ष किया कि गुजरात का एक चौकीदार देश का चौकीदार बनना चाहता है पर वह चाहते हैं कि चौकीदार एक व्यक्ति नहीं, देश की जनता हो।
मोदी ने जवाब दिया- मेरी चिंता है कि सवा सौ करोड़ चौकीदारों में आदर्श घोटाले, करगिल की विधवाओं के मकान कब्जाने वाले भी होंगे, राजस्थान-हरियाणा की जमीन हड़पने वाले भी होंगे। इसका मतलब यह हुआ कि वे दूध की रखवाली बिल्ली को दे देंगे।
लड़कों से गलतियां हो जाती हैं-मुलायम सिंह यादव ने मुरादाबाद की एक जनसभा में बयान दिया कि लड़कियां पहले दोस्ती करती हैं...फिर उसे रेप का नाम दे देती हैं..क्या रेप केस में फांसी दी जाएगी...लड़कों से गलतियां हो जाती हैं।
ऐसे कानूनों को बदलने की कोशिश की जाएगी। मुलायम को इस बयान के लिए कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी।
अबू आज़मी का विवादित बयान
सपा नेता अबू आजमी इनसे भी आगे गए। बोले- शादी से पहले संबंध बनाने वाली महिला और पुरुष दोनों को फांसी हो। आजमी की बहू ही इस बयान के मुखालफत में उतर आईं।
बुआ-फुआ, ललुआ - सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसे संभालने के लिए मायावती के लिए बुआ शब्द का इस्तेमाल शुरू कर दिया।
पर मायावती ने जब मुख्यमंत्री को ललुआ कहा तो वह फुआ कहने पर उतर आए।
मोदी के शेर की भी चर्चा
शेर-लकड़बग्घा, सांड-मोदी ने यूपी को इटावा लॉयन सफारी के लिए शेर देने का हवाला देते हुए तंज कसा तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शेर के बदले लकड़बग्घे देने को खूब भुनाया।
मुलायम के हेलीकॉप्टर केसामने सांड आने पर मोदी ने सांड तक को काबू न कर पाने पर तंज कसा तो मुख्यमंत्री ने भी बेहद तल्ख भाषा में जवाब दिया।
उल्लू-राहुल गांधी ने गुजरात के विकास मॉडल पर चर्चा करते समय कई बार कहा-मोदीजी, देश के लोगों को ‘उल्लू’ बनाना बंद करें।
चूहा - पति रॉबर्ट वाड्रा की सीडी और बुकलेट जारी होने के बाद प्रियंका ने कहा कि भाजपाई बौखलाए हुए चूहों की तरह दौड़ रहे हैं।
मायावती का भी हमला
गाय-भैंस-हाथी-मायावती ने मुलायम व अखिलेश के लिए अपने भाषणों में खूब कहा कि डॉ. अंबेडकर की वजह से बाप-बेटे मुख्यमंत्री बने वरना गांव में गाय-भैंस चरा रहे होते।
मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि मिल्क व मिल्क प्रोडक्ट का मायावती को पता चल गया तो वे हाथी छोड़कर गाय-भैंस का व्यवसाय शुरू कर देंगी।
व्यक्तिवाद के कारण बयानबाजी
इस पर साहित्यकार और आलोचक वीरेंद्र यादव का कहना है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि चुनाव मुद्दों पर केंद्रित नहीं रहा। इसके व्यक्ति केंद्रित होने के कारण आरोप-प्रत्यारोप भी व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर उतर आए। भाषा में गिरावट ने जिस स्तर को छुआ है, वह सचमुच शर्मनाक है।
इसमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने भी बड़ी भूमिका निभाई। प्राइम टाइम की पूरी की पूरी बहसें किसी एक नेता के एक अपशब्द या जुमले पर केंद्रित हो गईं।
इसे दरकिनार कर चर्चा देश व समाज के मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए थी। जरूरत इस बात की है कि भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर अगर स्वत: नियंत्रण न हो सके तो किसी ऐसी नियंत्रक संस्था का गठन किया जाना चाहिए जो इस पर प्रभावी निगरानी कर सके।
चुनाव प्रचार में जो गिरावट आ रही है, उस पर अब पारंपरिक तरीके से नियंत्रण संभव नहीं है। ऐसे में चुनाव आयोग को नए प्रभावी तरीके ईजाद करने होंगे।
मीडिया भी जिम्मेदार
इसी विषय पर गोंडा के एलबीएस के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर शैलेंद्र नाथ मिश्रा का कहना है कि ‘जल रहा है कौम, ये बहला रही है देश को/ किस तरह अश्लील है संसद की भाषा देखिए’। अदम गोंडवी की इन पंक्तियों से इस पीड़ा का एहसास किया जा सकता है।
इस चुनाव में भाषा को जिस निचले स्तर तक पहुंचाया गया है, उसके लिए संसद और विधानसभाओं में अर्से से दहाड़ने वाले बडे़-बड़े नेता ही शामिल रहे। जिनसे उम्मीद थी कि वे नए लोगों को रास्ता दिखाएंगे, वे झगड़ते नजर आए। जहां सवालों के जवाब देने थे, वहां बदजुबानी पर उतरे।
हमें लगता है कि जो विकास का काम नहीं करते, जिनके पास विकास का कोई विजन नहीं होता, वे इस तरह के हल्के शब्दों का इस्तेमाल कर चुनावी चर्चा में बने रहने की कोशिश करते हैं।
दूसरा, मीडिया भी ऐसे अपशब्दों को हाईलाइट करता है जिससे उन्हें प्रचार मिलता है। चुनाव आयोग के पास बहुत ताकत है। यदि आपत्तिजनक भाषा पर अंकुश को लेकर नियमों में बदलाव की आवश्यकता है तो भविष्य में ऐसा भी किया जाना चाहिए।