सहारनपुर में कांग्रेस और गठबंधन, दोनों के ही प्रत्याशी मुस्लिम हैं। कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के सामने 4.07 लाख वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे थे। बसपा के जगदीश राणा को 2.35 लाख वोट मिले थे। ऐसे में सहारनपुर से कांग्रेस से इमरान का टिकट पहले से ही पक्का माना जा रहा था। बसपा ने पिछले मेयर चुनाव में भाजपा को तगड़ी टक्कर देने वाले फजलुर्रहमान को उतारकर मुस्लिमों के सामने दूसरा विकल्प भी दे दिया।
विश्लेषक मानते हैं कि संयमित रहने और पढ़कर भाषण देने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिम मतों के बंटवारे की आशंका के मद्देनजर बहुत सोच-समझकर भाजपा के खिलाफ और गठबंधन के पक्ष में मुसलमानों से खुली अपील की है।
मायावती ने इसलिए की मुसलमानों से अपील
मेरठ के एनएएसपीजी कॉलेज के सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. अशोक शास्त्री कहते हैं, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि चुनाव में जनता के मुद्दों पर बात नहीं हो रही है। लोगों को बहकाने का खेल चल रहा है। भाजपा पहले से ही हिंदू ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री योगी मुस्लिम लीग को वायरस और कांग्रेस व गठबंधन के लोगों को उससे संक्रमित बताते घूम रहे हैं।
भाजपा नेता मुजफ्फरनगर दंगे की भी याद दिला रहे हैं। सहारनपुर में दो प्रमुख दलों के मुस्लिम प्रत्याशी होने की वजह से वहां मुस्लिम मतों में बंटवारे की आशंका बनी हुई है। इससे मायावती को नुकसान नजर आ रहा होगा। गठबंधन में यह सीट बसपा के हिस्से में है। ऐसे में मायावती भी मुस्लिम मतों को अपने पक्ष में करने के लिए ध्रुवीकरण की राह पर चल पड़ीं।
बसपा सुप्रीमो मायावती।
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चुनाव सर्वेक्षणों के कार्य से जुड़ी संस्था ‘लोकनीति’ के विशेषज्ञ व ‘मुस्लिम इन यूपी : कास्ट, क्लास एंड इलेक्टोरल पॉलिटिक्स’ रिसर्च पेपर के लेखक हिलाल अहमद कहते हैं कि मायावती ने कोई अकल्पनीय बात नहीं की है। सभी पार्टियां अपने-अपने मतदाताओं को रिझाने के लिए इस तरह की बातें करती रहती हैं।
आडवाणी जी कहा करते थे कि 80 प्रतिशत वोट हिंदुओं का मिलता रहे तो बाकी पर निर्भरता की जरूरत न पड़े। लेकिन अहम सवाल ये है कि क्या वाकई मतदाता ऐसी अपीलों से प्रभावित होते हैं। वास्तव में मतदाता के लिए जाति व धर्म मायने तो रखता है लेकिन वे वोटिंग में इस आधार पर बहुत कम प्रभावित होते हैं। वह निर्वाचन क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर वोट करते हैं।
एक्शन का रिएक्शन तो होगा ही
सिबली डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल गयास असद खां कहते हैं कि धार्मिक आधार पर वोट मांगना गलत है। यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन भी है। लेकिन जब कोई एक्शन करेगा तो रिएक्शन लाजिमी है। जब कोई मुस्लिम ध्रुवीकरण की कोशिश करेगा तो (एंटी पोलराइजेशन) ध्रुवीकरण की जमीन वैसे ही तैयार हो जाएगी। हालांकि, वह कहते हैं कि अब मतदाता बहुत सजग है। ऐसी अपील से वह प्रभावित नहीं होता।
उत्तर प्रदेश में 13 सीटें सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, नगीना, मेरठ, कैराना, मुरादाबाद, संभल, बरेली, रामपुर, बहराइच और श्रावस्ती मुस्लिम बहुल हैं। यहां मुस्लिमों की आबादी 30 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, 32 सीटें ऐसी हैं जहां 15 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम हैं।
पिछले चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस, प्रदेश में सपा थी मुस्लिमों की पसंद
सेंटर फॉर द स्टडी आफ डवलपिंग सोसाइटी (सीएसडीएस) के एक अध्ययन के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिमों की पसंद कांग्रेस बनी थी और उसे 37.6 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं, यूपी के मुसलमानों ने सबसे ज्यादा समर्थन सपा को दिया था। उसे 58 प्रतिशत वोट मिले थे। भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर 8.5 प्रतिशत जबकि यूपी में 10 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले थे।
मुस्लिम लीग एक वायरस है। एक ऐसा वायरस जिससे कोई संक्रमित हो गया तो वो बच नहीं सकता और आज तो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ही इससे संक्रमित हो चुका है। सोचिए अगर ये जीत गए तो क्या होगा? ये वायरस पूरे देश में फैल जाएगा।
- योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री यूपी (ट्विटर पर)
मुजफ्फरनगर में हुए दंगों में बहुसंख्यक समुदाय के लोग मारे जा रहे थे, तब ये पार्टियां क्या कर रही थीं? चौधरी चरण जी किसानों की, गांवों की और इस देश की बात करते थे। लेकिन उनकी विरासत उनके बेटे और पोते संभाल नहीं पाए। आज दंगाइयों के साथ उन्हें देखकर बहुत दु:ख हो रहा होगा।
- योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री यूपी (ट्विटर पर)
मुस्लिम समाज से यह कहना चाहती हूं कि भावनाओं में बहकर, रिश्ते-नातेदारों की बातों में आकर वोट बांटना नहीं है, बल्कि एकतरफा वोट गठबंधन को ही देना है। कांग्रेस के झांसे में न आएं। भाजपा को हराने के लिए गठबंधन को वोट दें।
-गठबंधन की सहारनपुर रैली में मायावती