सपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव (नेताजी) के 81वें जन्मदिन पर प्रदेश में नए सियासी संदेश निकल सकते हैं। यादव परिवार में चाचा-भतीजे में अनबन के बीच पिछले वर्ष उन्होंने पुत्र अखिलेश और भाई शिवपाल सिंह यादव, दोनों के साथ अलग-अलग केक काटा था। दोनों की ही पार्टियों को आशीर्वाद देकर राजनीतिक पंडितों को भी चकरा दिया था।
इसलिए इस बार यह बात खासतौर से देखने वाली होगी कि पिछले वर्ष की तरह उनका साथ दोनों ही दलों को मिलता है या इस बार वह अपना जन्मदिन सिर्फ पुत्र के साथ ही मनाते हैं। जन्मदिन मनाने के लिए मुलायम सिंह यादव बृहस्पतिवार को दिल्ली से लखनऊ आ गए हैं।
वैसे तो शिवपाल सिंह यादव इटावा में हैं और शुक्रवार को वह वहां मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर आयोजित दंगल का उद्घाटन तथा ‘लोहिया-मुलायम डाट इन’ ई-पुस्तक का विमोचन करेंगे। पर, राजधानी में उनकी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) मुख्यालय पर मुलायम का जन्मदिन समारोह आयोजित किया गया है।
उधर, अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी के मुख्यालय पर जन्मदिन समारोह मनाने की तैयारियां की गई हैं। इस बीच, जिस तरह शिवपाल ने यह कहकर कि अखिलेश चाहेंगे तो प्रसपा 2022 में उनसे गठबंधन कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि वह चाहते हैं कि परिवार एक रहे, उसके चलते सियासी गलियारों में यादव परिवार में एका की अटकलें लगने लगी हैं।
उधर, अखिलेश यादव ने और तो कुछ नहीं कहा लेकिन यह कहकर कि उचित समय पर वह इस बारे में बोलेंगे, एका की संभावनाओं को बिल्कुल खारिज नहीं किया है। इससे भी एका की अटकलों को आधार मिला है। नेताजी कते जन्म दिन पर यादव परिवार में एका की अटकलों की थाह मिल सकती है।
इसलिए हैं जन्मदिन के मायने
भले ही इस जन्मदिन पर भी पुत्र और भाई के दफ्तरों में अलग-अलग जश्न मने लेकिन देखने वाली बात मुख्य रूप से यह जरूर होगी कि नेता जी और अखिलेश व शिवपाल इस मौके पर क्या बोलते हैं। इससे न सिर्फ इस बात का संकेत मिल जाएगा कि परिवार में टूट के बाद सियासी नुकसान का सामना कर रहे चाचा-भतीजे के रुख में एक-दूसरे के प्रति कुछ नरमी आई है या बयानों के विपरीत तल्खी पहले की तरह ही बरकरार है।