प्रादेशिक को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) ने लखनऊ दुग्ध संघ समेत छह दुग्ध संघों की समितियों में डेटा प्रोसेसर मिल्क कलेक्शन यूनिट (डीपीएमसीयू) की खरीद एवं स्थापना में हुए खेल का खुलासा किया है।
दुग्ध संघों ने समितियों की जितनी संख्या बताकर डीपीएमसीयू की खरीद कराई थी, वह अब तक स्थापित ही नहीं हुई। इस खुलास पर पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक बाबू लाल मीणा ने सभी छह महाप्रबंधकों (यूनिट प्रभारी) को निलंबित करने का अल्टीमेटम दिया है।
अल्टीमेटम पाने वाले महाप्रबंधकों पर आरोप है कि उन्होंने फेडरेशन से आपूर्ति हुई डीपीएमसीयू को समितियों के सेंटर पर स्थापित नहीं किया है। इससे फेडरेशन को समिति पर होने वाले दूध कलेक्शन एवं उसकी गुणवत्ता की ऑनलाइन रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। प्रबंध निदेशक ने महाप्रबंधकों को बीते 14 नवंबर को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा नोटिस मिलने के सात दिन में जवाब मांगा गया है। हालांकि अब तक इन लोगों ने जवाब नहीं दिए हैं।
गोंडा-लखनऊ के महाप्रबंधकों समेत इन्हें मिला नोटिस
निलंबन का नोटिस पाने वालों में लखनऊ दुग्ध संघ के महाप्रबंधक हंसवीर वर्मा, प्रयागराज दुग्ध संघ के डीके सिंह, मुरादाबाद दुग्ध संघ के दलजीत सिंह, गोंडा दुग्ध संघ के इंद्र भूषण, मेरठ दुग्ध संघ के विकास बालियान और बरेली दुग्ध संघ के महाप्रबंधक गंगा प्रसाद शामिल हैं।
क्या है डीपीएमसीयू
यह एक कंप्यूटरीकृत प्रणाली है। इसमें समिति के किसान से दूध का कलेक्शन करते समय तौल गुणवत्ता की जांच जाती है। जांच में पानी की मिलावट एवं फैट की उपलब्धता की स्थिति भी पता चल जाती है और रिपोर्ट ऑनलाइन पीसीडीएफ मुख्यालय पहुंच जाती है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंचा है मामला
डीपीएमसीयू की खरीद में गड़बड़ी का यह मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंच चुका है। इस पर आयोग के अध्यक्ष ने मुख्यसचिव को विजिलेंस जांच कराने के निर्देश दिए थे। आयोग से शिकायत हुई थी कि दुग्ध संघों में जितनी समितियां नहीं उससे अधिक डीपीएमसीयू की खरीद की गई है। आयोग के निर्देश के क्रम में प्रबंध निदेशक ने अब नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है।
लखनऊ में 439 में से 74 की रिपोर्ट
लखनऊ दुग्ध संघ के महाप्रबंधक हंसवीर वर्मा को जारी नोटिस में कहा गया है कि 439 डीपीएमसीयू में सिर्फ 74 की रिपोर्ट मिली है। इसी प्रकार प्रयाराज में 218 में से 50 डीपीएमसीयू , मुरादाबाद में 201 में से 37 डीपीएमसीयू , गोंडा में 206 में से 33 डीपीएमसीयू , मेरठ में 446 में से 118 डीपीएमसीयू, बरेली में 152 में से 16 डीपीएमसीयू चालू पाई गई हैं।
समिति से अधिक खरीद लीं डीपीएमसीयू
पीसीडीएफ ट्रेड यूनियन मंच के प्रांतीय महामंत्री श्याम सुंदर शुक्ला के मुताबिक तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने दुग्ध संघों की सांठगांठ से समितियों से अधिक डीपीएमसीयू की खरीदी गई है। जबकि एक डीपीएमसीयू की अनुमानित कीमत 1.25 लाख रुपये है। जो डीपीएमसीयू समितियों में नहीं लग सकी वह दुग्ध संघ में पड़ी हैं। उन्होंने प्रबंध निदेशक की कार्रवाई की सराहना की है।
पीसीडीएफ की डीपीएमसीयू का ब्योरा
दुग्ध संघ आपूर्ति स्थापित
लखनऊ 722 439
गोंडा 471 206
प्रयागराज 438 218
मेरठ 1001 446
मुरादाबाद 501 201
बरेली 523 152