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पीएम मोदी ने उद्योगपतियों से करीबी को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना, खींचा 2019 का खाका

Mon, 30 Jul 2018 07:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : amar ujala
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार साल बनाम सत्तर साल से लोकसभा की चुनावी चौसर सजा गए। प्रदेश में 60 हजार करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाओं का शिलान्यास करते हुए उन्होंने सियासी लड़ाई को काम बनाम बात करने वालों के बीच समेटने की भी कोशिश की।

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उन्होंने समारोह को सरकार की नीयत पर सवाल उठाने वालों को जवाब देने का जरिया भी बनाया। लगातार दूसरे दिन लखनऊ में केंद्र सरकार के कामों को अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों और संकल्पों से जोड़कर यह भी साफ कर दिया कि मिशन 2019 में अटल का नाम भी उनका सहारा होगा।

एक दिन पहले सरोकारों पर काम करने वाली सरकार की छवि का संदेश देकर चुनावी समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश करने वाले मोदी ने दूसरे दिन रविवार को विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया। विपक्ष के सरोकारों पर भी सवाल उछाले जो निश्चित रूप से चुनाव में किसी न किसी रूप में प्रचार के दौरान गूंजेंगे। मोदी यह समझते हैं कि चुनाव भले ही लोकसभा का हो, लेकिन राज्यों में वहां की सरकारों के काम और सरोकार भी अहम भूमिका निभाते हैं।
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शायद यही वजह रही कि उन्होंने लोगों के दिमाग में यह बैठाने पर खास फोकस किया कि पांच माह में 60 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर करार और शिलान्यास यूपी में योगी के नेतृत्व में भाजपा की काम करने वाली सरकार होने की वजह से संभव हुआ। वह यह बता गए कि शिलान्यास की जाने वाली परियोजनाओं को परवान चढ़ाने और उनका लाभ प्रदेश को मिले, इसके लिए केंद्र में भाजपा की ही सरकार जरूरी है।

सवालों पर भी साधे समीकरण

- फोटो : amar ujala
विरोधी दल, मोदी की उद्योगपतियों से नजदीकी पर सवाल उठाते रहते हैं। शायद इसी वजह से प्रधानमंत्री ने देश के सबसे बड़े राज्य यूपी की राजधानी लखनऊ में उद्योगपतियों के जमावड़े को ही इन सवालों का जवाब देने के लिए चुना।

देश के विकास में उद्योगपतियों के योगदान का उल्लेख तथा महात्मा गांधी और बिड़ला की नजदीकी का हवाला देकर लोगों के दिमाग में यह बैठाने की कोशिश की कि विपक्ष की तरफ से अकारण तिल का ताड़ बनाया जा रहा है। मोदी ने इस आयोजन के बहाने यह बताने का प्रयास किया है कि उद्योगपतियों से उनकी नजदीकी पर सवाल उठाने वाले वास्तव में देश का विकास रोकना चाहते हैं।

हमलों को बनाया हथियार

- फोटो : amar ujala
हमलों को हथियार बनाने में माहिर मोदी ने खूबसूरती के साथ इस कार्यक्रम के जरिये सियासी लड़ाई को चार बनाम सत्तर साल में तब्दील करने की कोशिश की। मोदी जानते हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान पर इस बार उन्हें विरोधियों पर हमला नहीं, बल्कि अपने काम बताने होंगे।

इसीलिए मोदी ने बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित जनता के सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी सरकार के काम और इरादों का हवाला देते हुए यह मुद्दा भी उछाल दिया कि जो लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि मोदी चार साल में यह काम क्यों नहीं कर पाए, उन्हें यह जवाब देने को भी तैयार रहना चाहिए कि 70 साल में वह काम क्यों नहीं हो पाया?

साफ है कि मोदी लड़ाई को 4 बनाम 70 साल के साथ काम करने वाले और बस बात करने वालों के बीच भी केंद्रित करने की तैयारी में हैं। चुनाव में अगर कुछ उद्योगपतियों के भाग जाने का सवाल विपक्ष की तरफ से उछले उससे पहले ही भाजपा ने यह सवाल उठाएगी कि 70 साल सरकार चलाने वालों ने इन घोटालेबाजों पर कार्रवाई क्यों नहीं की।
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इसलिए तो सहारा नहीं बने अटल

- फोटो : amar ujala
सभी को पता है कि अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लोगों को न सिर्फ भावात्मक रूप से, बल्कि सरोकारी, संवेदनशील और काम करने वाले नेता के रूप में भी आकर्षित करता है। विपक्ष अटल के काम की अनदेखी के सवाल पर भी मोदी को घेरता रहा है। इसीलिए मोदी ने दोनों दिन अटल के नाम का उल्लेख किया। साथ ही कुछ उदाहरण देकर यह बताने की कोशिश की कि उनकी सरकार अटल के सपनों को पूरा करने के रास्ते पर ही चल रही है। वह काम कर रहे हैं, इसलिए सवाल भी उठाए जा रहे हैं।
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