मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बुधवार को अयोध्या यात्रा कई संदेश देगी। साथ ही सूबे की सियासत के भावी समीकरणों का भी संकेत देगी। यह यात्रा भले ही फैजाबाद मंडल की कानून-व्यवस्था व विकास कार्यों की समीक्षा और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव की वजह से तय हुई हो, लेकिन यह यात्रा यहीं तक सीमित नहीं रहने वाली।
इसके राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इसका संबंध भविष्य में योगी की चुनावी यात्रा से भी जुड़ा हो सकता है। योगी बुधवार सुबह करीब नौ बजे अयोध्या पहुंचेंगे। वे सबसे पहले हनुमान गढ़ी और फिर श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर विराजमान रामलला के दर्शन करेंगे।
दर्शन के बाद वे सरयू घाट पर सरयू नदी का पूजन करेंगे। फिर राम की पैड़ी देखने के बाद वे फैजाबाद पहुंचकर भाजपाइयों से मिलेंगे। साथ ही फैजाबाद मंडल की कानून-व्यवस्था व विकास कार्योँ की समीक्षा करेंगे।
इसके बाद वे फिर अयोध्या लौटकर राममंदिर आंदोलन का केंद्र रहे दिगंबर अखाड़े के संत-महात्माओं से भेंट करेंगे। इस अखाड़े का महत्व इसलिए भी हैं क्योंकि यहीं पर मंदिर आंदोलन के नायक स्व. महंत रामचंद्र परमहंस रहा करते थे।