छात्र राजनीति से भगवा राजनीति में सक्रिय एक नेता का जवाब नहीं। हमेशा इसी फिक्र में रहते हैं कि अखबारों में फोटो आ जाए और नाम छप जाए।
वाकया अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के लखनऊ दौरे का है। पहले उनके स्वागत में हिंदी में पोस्टर लगवाए। मोदी और अमित शाह से लेकर न जाने किस-किस नेता के साथ अपनी फोटो चस्पा कराकर क्लिंटन का स्वागत करने वाली होर्डिंग लगवाई।
किसी ने कहा कि हिंदी में तो क्लिंटन को कुछ समझ में आने से रहा। बेचारों को अपनी गलती का एहसास हुआ। तड़ से निकाल लिया नया फार्मूला। रातोंरात अंग्रेजी में होर्डिंग लगवा डाली। समस्या आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति से बात कैसे करेंगे।
दुभाषिया के जरिये बात करेंगे तो वो बात नहीं रहेगी। क्लिंटन के साथ आए प्रतिनिधि मंडल के एक-दो लोगों से अंग्रेजी के एक-दो शब्द बोलकर उन्हें भी इंप्रेस करने की कोशिश की।
जनाब पर अंग्रेजी की खुमारी कुछ ऐसी चढ़ी कि एक युवती से बलात्कार व हत्या के मामले में प्रदर्शन करने पहुंचे तो वहां भी ‘वी वान्ट जस्टिस’ बोलने लगे। कुछ लोगों ने कुहनी मारा तो खुमारी टूटी। सच्चाई का एहसास हुआ और सरकार मुर्दाबाद बोलना शुरू किया।