सूबे की सरकार की पब्लिसिटी करने वाले महकमे के जिला और मंडल स्तरीय अफसरों के तबादलों पर खूब चुटकियां ली जा रही हैं।
मीडिया से जुड़े इस महकमे के मुख्यालय में तैनात एक अफसर की त्वरित टिप्पणी थी, अभी तो शुरुआत है, आगे-आगे देखिये होता है क्या ? अब जुबानी जमा खर्च और मठाधीशी नहीं चलेगी, काम करना होगा।
बॉस (शायद प्रमुख सचिव या फिर निदेशक) के तेवर तीखे हैं। कहा जा रहा है कि सरकार की इमेज बिल्डिंग के लिए चिंतित एक आला अधिकारी के प्रयासों को निचले स्तर के लोग मंजिल तक नहीं पहुंचने दे रहे।
दरअसल, वे खुद ही लॉबिंग के माहिर हैं। अभी तक इसका लाभ उन्हें तो मिलता रहा है लेकिन सरकार को नहीं।
अब तलाश ऐसे लोगों की है जो फास्ट हों और जिनकी ट्यूनिंग फाइन हो। क्या करें, महकमा ही ऐसा है कि काम लिखित में नहीं इशारों पर जो होता है।