नेताजी के बेतुके बोलों पर टीवी चैनलों के प्राइम टाइम में चर्चा क्या हुई पार्टी और सरकार में कानाफूसी का दौर शुरू हो गया।
चुनाव में करारी हार के बाद सरकारी तंत्र के तौर-तरीकों में बदलाव और गुड गवर्नेंस के जरिये डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में जुटे वजीर-ए-आला तक भी मामला पहुंच गया है।
रोजा इफ्तारी में शिरकत की वजह से राजधानी में तमाम समाजवादियों और वजीरों का जमावड़ा था। जाहिर है, इस मुद्दे पर गुफ्तगू होना लाजिमी था।
पार्टी के कुछ पूर्व ओहदेदार और एक-दो वजीर भी ऑफ द् रिकॉर्ड विवादित बयान पर नाक भौं सिकोड़ते नजर आए।
एक ने कहा, बयान से इत्तेफाक तो सूबे में पार्टी और सरकार के सुप्रीमो भी नहीं रखते लेकिन, चुप्पी तोड़ भी तो नहीं सकते। उनके डैमेज कंट्रोल को बेतुके बोल काफी दिन पीछे खिसका देते हैं।
इतने पर एक राज्यमंत्री ने तपाक से कहा, नेताजी की बात गलत नहीं है बशर्ते मीडिया संदर्भ से काटकर न दिखाए। सब कुछ इन्हीं (मीडिया वालों) का करा धरा है।