पिछले दिनों वैज्ञानिकों वाले विभाग का एक कार्यक्रम था। इसमें वैज्ञानिकों को पुरस्कार दिया जाना था। करीब नौ महीने लंबे इंतजार के बाद इस कार्यक्रम का मुहूर्त निकला था।
कार्ड छप गए और वितरित भी हो गए, लेकिन कार्यक्रम के ठीक दो दिन पहले सरकार ने इस विभाग के मंत्री को ही बदल दिया। अब अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए।
आमंत्रण पत्र में पुराने मंत्री का नाम था। कार्यक्रम स्थल के पीछे लगने वाले बैकड्रॉप (मंच के पीछे लगने वाला बोर्ड) में भी पुराने मंत्री की ही फोटो चस्पा थी।
आनन-फानन में पुराने मंत्री का नाम हटाकर नए मंत्री के नाम की चिप्पी लगाई गई। कुछ कार्ड पर नए मंत्री के नाम का स्टिकर लगाकर उन्हें बांटा गया।
कार्यक्रम के दिन एंकर को भी नए मंत्री का नाम रटाया गया, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से कुछ देर पहले ही वहां पुराने मंत्री पहुंच गए। आयोजकों के हाथ-पांव फिर फूल गए।
उन्होंने तुरंत ही एंकर को बुलाकर फिर बताया कि यह पुराने मंत्री ही हैं। कहीं एंकर गलती से नए मंत्री का नाम न ले ले। किसी तरह कार्यक्रम निपटा, तब जाकर अधिकारियों ने चैन की सांस ली।