मौका भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन का था। सूबे के एक नेता भाषण देने उठे तो लगे राजनाथ की तारीफ में कसीदे पढ़ने।
बोले, लालबहादुर शास्त्री पहले गृहमंत्री ही बने थे। बाद में वे प्रधानमंत्री बने और देश का नेतृत्व किया। राजनाथ सिंह में भी अद्भुत नेतृत्व क्षमता है।
नेताजी की बात पर तालियां बजीं। पर, राजनाथ तौलिया से माथा पोंछने लगे। बोलने आए, तो शुरुआत मोदी के गुणगान से की। बोले, मोदी की नेतृत्व क्षमता का जवाब नहीं।
हम लोग उनके नेतृत्व में देश को विकास के शिखर पर पहुंचाएंगे। मामला क्या है यह तो ऊपर वाला जाने पर माजरा जैसा दिखाई दिया, उसे देखकर लोग यही न समझ पा रहे हैं कि नेताजी ने राजनाथ की तारीफ की या तीर चलाया।