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यूपी में तो सियासी समीकरण तय कर रहे सुरक्षा का दायरा

Wed, 08 Jan 2014 10:46 PM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
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उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण माननीयों की सुरक्षा के मानकों पर भारी हैं।
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राज्य स्तरीय सुरक्षा समिति की बैठक के फैसलों की आड़ में राज्य सरकार इन्हें अमल में लाती है।

सरकार की मंशा को भांपते हुए आला अफसर भी वैसा ही रवैया अपनाते हैं।

सुरक्षा से जुड़े ऐसे ही एक प्रकरण में अदालत ने अवमानना के एक मामले में तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव को काफी देर तक कोर्ट में खड़ा रखा था।

तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप बसपा सरकार में काबीना मंत्री रहे रामवीर उपाध्याय की सुरक्षा कम करने के बाद उसे बहाल करने को तैयार नहीं थे।
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सरकार के रुख को देखते हुए पूर्व मंत्री ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

अदालत के रुख पर सरकार को मजबूर होकर पूर्व मंत्री की सुरक्षा बहाल करनी पड़ी थी।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद वहां के मुख्यमंत्री और अन्य माननीयों द्वारा न्यूनतम सुरक्षा या सुरक्षा न लेने के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी यह बयान जारी किया था कि अपनी सुरक्षा में कटौती कर चुके हैं।

असलियत इसके विपरीत है। मुख्यमंत्री की सुरक्षा में कटौती के नाम पर केवल इतना हुआ था कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद अखिलेश यादव ने अपनी फ्लीट के वाहनों की संख्या कम करने को कहा।
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उल्लेखनीय है पूर्ववर्ती बसपा सरकार की मुख्यमंत्री मायावती की फ्लीट में कई दर्जन वाहन शामिल रहते थे।

सीएम के दावे अपनी जगह हैं, पर असलियत यही है कि पिछले दिनों उच्च स्तर पर हुई बैठक में तय हुआ था कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा और चौकस कर सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए।
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