ट्रैफिक पुलिस की ओर से किए जा रहे ऑनलाइन चालान लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। गाड़ी किसी की और चालान किसी और के पते पर भेजा जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस के इसी खेल मेें गोमती नगर स्थित दुर्गापुरी के छोटा भरवारा निवासी कैलाश वर्मा परेशान होकर घूम रहे हैं।
कैलाश ने बताया कि वह अमेठी जिले में चकबंदी लेखपाल हैं। इसलिए लखनऊ आना भी होता है। उनकी काले रंग की स्कूटी का पांच माह में दो बार चालान हो चुका है। पहला चालान पांच जनवरी को 1500 रुपये का हुआ। चालान की रसीद की फोटो में साफ-साफ बाइक दिख रही है। लेकिन इसके बाद भी ट्रैफिक पुलिस ने मेरे घर पर चालान भेज दिया।
पिछले दिनों पुलिस वाले नोटिस लेकर आए। मैंने अपनी समस्या उनसे बताई लेकिन वह भी कोई हल नहीं खोज सके। वहीं मेरी गाड़ी का दूसरा चालान 17 जून को हो गया। अबकी मोबाइल पर बात करते हुए बिना हेलमेट के गाड़ी चलाने में चालान में आधार बनाया गया।
जबकि ऑनलाइन चालान की रसीद में दिख रही फोटो में कोई लड़का सफेद रंग की स्कूटी चला रहा है। यह गाड़ी भी उनकी नहीं है। फिर भी गड़बड़ी के चलते दो बार मेरा चालान काटा जा चुका है। इस बार 600 रुपये पैनाल्टी लगाई है। बताया कि ट्रैफिक पुलिस की इस लापरवाही से एक अच्छी व्यवस्था का बंटाधार हो सकता है।