चिनहट पुलिस ने नौ सितंबर को देवरिया गांव में अवैध शराब की फैक्टरी पकड़ी थी। पुलिस ने यहां से दो लोगों को गिरफ्तार किया। इस फैक्टरी के संचालकों में तीन लाइसेंसधारक दुकानदार सहित आठ लोग और शामिल थे जिनकी तलाश की जा रही है। पुलिस ने इस फैक्टरी से कुल 75 लाख रुपये का माल बरामद किया था। फैक्टरी एक मकान में चल रही थी। जो प्रॉपर्टी डीलिंग के प्रयोग में लिया गया था। लेकिन यहां से पानी की आपूर्ति का भी काम किया जा रहा था। आरओ फैक्टरी की आड़ में यह गोरखधंधा चल रहा था।
केस-2
चिनहट पुलिस ने ही पांच अक्तूबर को जानकीपुरम में छापा डालकर अवैध शराब की फैक्ट्री पकड़ी। पुलिस ने यहां से 25 लाख रुपये का सामान बरामद किया है। पुलिस केहत्थे दो लोग चढ़े। यहां से शराब की आपूर्ति सरकारी ठेकों व खुदरा दुकानों को की जाती थी। पुलिस के मुताबिक, नकली शराब के कारोबारियों ने भी अपना एजेंट बना रखा था जिनके माध्यम से सामान बेचते थे।
केस-3
सरोजनीनगर पुलिस ने 10 अक्तूबर को मुल्लाहीखेड़ा में छापा डाला। यहां 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया जो शराब बनाने में मदद करते थे। पुलिस के मुताबिक, यह अवैध शराब फैक्टरी सीआरपीएफ का बर्खास्त सिपाही मनोज यादव अपने रिश्तेदार विकास यादव के साथ मिलकर निर्माणाधीन वेयर हाउस में संचालित करता था। पुलिस ने यहां से करीब 35 लाख रुपये का सामान बरामद किया है।
यह तो मात्र कुछ उदाहरण हैं। ऐसी कई और अवैध फैक्टरी राजधानी के कई इलाकों में संचालित हो रही हैं। ज्यादातर अवैध शराब का कारोबार राजधानी के नई विकसित एरिया में फल-फूल रहा है। राजधानी में अवैध शराब का काला कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। अब यह धंधा आरओ प्लांट की आड़ में किया जा रहा है। हाल ही में एक माह के अंदर पुलिस ने तीन अवैध शराब की फैक्ट्रियां पकड़ी हैं जिसमें करीब सवा करोड़ रुपये की अवैध शराब, निर्माण सामग्री, शीशी व पैकिंग का सामान बरामद किया है। इन मामलों में पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन अवैध फैक्ट्रियों के मिलने के बाद पुलिस विशेष अभियान चलाकर आरओ प्लांट की कुंडली खंगालने की तैयारी कर रही है। इसके लिए विशेष दस्ता बनाया जाएगा जो पूरी जानकारी जुटाएगा। उसकी रिपोर्ट मिलने के बाद अवैध रूप से संचालित फैक्ट्रियों पर छापा डाला जाएगा।हर माह इन अवैध फैक्टरियों के जरिए सरकार के खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लग रही है। खास बात यह है कि ज्यादातर अवैध फैक्टरियों के बारे में आबकारी विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को भी जानकारी है। लेकिन उनके खिलाफ सीधे कार्रवाई करने से बचते हैं। इस वजह से यह धंधा लगातार फलफूल रहा है।
ऐसा नहीं है कि एक माह में ही पुलिस सक्रिय हुई है। इसके पहले भी राजधानी के कुछ इलाकों में पुलिस ने इस तरह के अवैध कारोबार को पकड़ा था। लेकिन मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने के बाद पुलिस भी भूल गई और आबकारी विभाग ने भी अपनी जिम्मेदार से दूरी बना लिया। इंदिरानगर में 27 फरवरी 2018 को तत्कालीन एसओ मुकुल प्रकाश वर्मा ने पानी गांव में अवैध फैक्टरी पकड़ी थी। यहां से पुलिस ने करीब 20 लाख रुपये का सामान बरामद किया था। इसके बाद यहां फैक्टरी बंद हो गई। लेकिन इसके बाद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। न ही आबकारी विभाग ने ऐसे लोगों को चिह्नित करने की कोशिश की ।
पानी प्लांट चलाने वालों की तैयार होगी सूची
सरोजनीनगर में शनिवार को अवैध शराब फैक्टरी पकड़ी गई। यह फैक्टरी आरओ प्लांट की आड़ में चल रही थी। इसके बाद पुलिस कमिश्नर के आदेश पर पूरे क्षेत्र में चलने वाले आरओ प्लांट के बारे में जानकारी जुटाने के लिए विशेष टीम लगाने की तैयारी हो गई है। यह टीम सभी प्लांट की जानकारी हासिल करेगी। इसके बाद संदिग्धों की सूची तैयार कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक-एक जोन कर सभी पांचों जोन में इस तरह से अभियान चलाकर फैक्टरियों की कुंडली खंगाली जाएगी।
चिरंजीव नाथ सिन्हा, एडीसीपी मध्य