आरोप ये भी है कि पीड़िता के पिता को जेल भेजने का काफी समय से दबाव डाला जा रहा था। यही नहीं, विधायक के दबाव में ही लखनऊ से अलग-अलग स्तर पर मांगी जा रही सूचनाओं में खेल होता रहा। बाद में 3 अप्रैल को जब मारपीट की घटना हुई तो पहली एफआईआर पीड़िता के पिता (जिसकी पिटाई की गई थी) के खिलाफ दर्ज कर आर्म्स एक्ट में जेल भेज दिया गया।
यही वजह रही कि शुरुआती कार्रवाई में ही थाना प्रभारी अशोक भदौरिया, सब इंस्पेक्टर केपी सिंह और चार सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया। थाने के पुलिसक र्मियों से लेकर एसपी तक विधायक के कारिंदे की तरह काम कर रहे थे।
पुलिस वालों पर भी कार्रवाई संभव
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में सीबीआई पुलिस कर्मियों से भी पूछताछ कर रही है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही पुलिस की भूमिका तय करते हुए सीबीआई इन पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है।