धरना-प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने को तैनात पुलिसकर्मियों के कंधे पर स्वचालित रायफल नहीं, हाथों में होगा करंट वाला डंडा और असलहों में रबर बुलेट होगी। मुठभेड़ या खास मौके पर ही घातक हथियारों का इस्तेमाल होगा।
विवेक तिवारी हत्याकांड को लेकर फजीहत होने पर आला अफसरों ने पुलिस की शस्त्र प्रणाली पर विचार शुरू किया है। अमेरिका व अन्य विकसित देशों की व्यवस्था पर मंत्रणा चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, हत्याकांड के बाद सिपाहियों को पिस्टल देने, प्रशिक्षण की खानापूरी के चलते पुलिसकर्मियों पर संयम की कमी व अन्य बातें सामने आईं।
धरना-प्रदर्शन के दौरान स्वचालित हथियारों से लैस पुलिस व पीएसी के जवान तैनात किए जाने पर सवाल उठा है। अफसरों का मानना है कि प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने पर पानी की बौछार, आंसू गैस या डंडे की ही जरूरत होती है।