सोशल मीडिया पर ‘जहर’ घोलने वालों पर अंकुश लगाने के लिए यूपी पुलिस ने लखनऊ व मेरठ में सोशल मीडिया कमांड एंड रिसर्च सेंटर (एसएमसीआरसी) की स्थापना कर दी है। आईजी कानून व्यवस्था को इसका नोडल अफसर बनाया गया है।
इन सेंटरों को एक खास सॉफ्टवेयर एडवांस एप्लीकेशन फॉर सोशल मीडिया एनालिटिक्स यानी आसमा से लैस किया गया है। इस सॉफ्टवेयर से साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले पोस्ट व उनके ट्रेंड पर कड़ी नजर रखी जा सकती है। इससे ऐसे तत्वों पर कार्रवाई करना आसान होगा।
आईजी कानून व्यवस्था ए. सतीश गणेश ने बताया कि सोशल मीडिया कमांड एंड रिसर्च सेंटर के जरिये यह पता लगाना आसान हो गया है कि कटुता फैलाने वाली पोस्ट किसने डाली है।
इससे यह भी पता चल जाएगा कि संबंधित पोस्ट किस स्मार्ट फोन, लैपटॉप, आईपैड, कम्प्यूटर या फिर टैब से डाली गई है।
जारी किए गए कड़ी कार्रवाई करने का आदेश
पता करने के बाद न सिर्फ आपत्तिजनक पोस्ट का खंडन किया जाएगा, बल्कि उस वेब पेज को ही ब्लॉक किया जाएगा। डीजीपी जावीद अहमद ने भी सभी कप्तान, डीआईजी व आईजी को पत्र भेजकर सोशल मीडिया पर जहर घोलने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
ऐसे काम करता है आसमा
आईजी कानून व्यवस्था ए. सतीश गणेश ने बताया कि मेरठ में डीआईजी तो लखनऊ में एसटीएफ कार्यालय में यह सेंटर स्थापित किया गया है। इन सेंटरों में इंस्टॉल किया गया आसमा सॉफ्टवेयर गूगल की तरह सर्च इंजन का काम करता है।
‘की वर्ड’ डालते ही सोशल मीडिया में संबंधित विषय पर ट्रेंड कर रहे पोस्ट स्क्रीन पर खुल जाते हैं। इससे साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाले पोस्ट पर बारीकी से नजर रखना आसान हो गया है।
तेजी से फैल रहे पोस्ट पर तत्काल होगी कार्रवाई
सॉफ्वेयर के जरिये देखा जाएगा कि पोस्ट कितना ट्रेंड कर रहा है। यदि पोस्ट तेजी से फैल रहा है तो तत्काल उस पर कार्रवाई की जाएगी।
रिसर्च सेटर द्वारा आपत्तिजनक पोस्ट का तत्काल खंडन किया जाएगा। वेब पेज को ब्लॉक कराने के लिए केंद्र सरकार के दूरसंचार मंत्रालय में बनी टीम की भी मदद ली जाएगी।
इस तरह की जाएगी कार्रवाई
आरोपी को पहले सीआरपीसी की धारा 91 के तहत नोटिस दिया जाएगा। यदि वाजिब जवाब नहीं मिला तो एफआईआर दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
हर जिले में 200-300 रखे जाएंगे डिजिटल वालंटियर
स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) की तर्ज पर ‘डिजिटल वालंटियर्स’ रखे जाएंगे। ये वालंटियर सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली अफवाहों का खंडन करेंगे। हर जिले में 200 से 300 वालंटियर रखने की योजना है।
यह पुलिस व समाज के बीच पुल की तरह काम करेंगे। इसमें वही लोग रखे जाएंगे जो इंटरनेट के जानकार के साथ ही सोशल मीडिया फ्रेंडली हों।
आगे क्या : हर जिले की सर्विलांस सेल को दिया जाएगा प्रशिक्षण
जिला स्तर पर सर्विलांस सेल के कर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। जिले के अलावा परिक्षेत्र व जोन स्तर पर भी दो-दो पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन्हें सूचनाओं पर किस प्रकार कार्रवाई की जानी है, इसके बारे में भी बताया जाएगा।
9454401002 पर भी की जा सकती है शिकायत
तकनीकी सेवा मुख्यालय पर ‘वॉट्सएप सर्विलांस केंद्र’ भी चल रहा है। इसके सीयूजी नंबर 9454401002 पर कोई भी शख्स विवादित या आपत्तिजनक संदेशों के संबंध में जानकारी दे सकता है। इन संदेशों का विश्लेषण कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।