अपराधियों से लोहा लेने के लिए अमेरिका की स्पेशल वीपन एंड टैक्टिक्स टीम (स्वाट) की तर्ज पर अब यूपी पुलिस ने खतरनाक ‘वार’ टीम का गठन किया है।
ग्लॉक पिस्टल, एमपी-5 जैसे हल्के असलहों, बुलेटप्रूफ हेलमेट और काले रंग की बुलेट प्रूफ वर्दी से लैस पुलिस के ये कमांडो अत्याधुनिक हथियारों से लैस होंगे।
टीम को छह सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा जो पीएसी की 32 व 35 वाहिनी में और फिर एसटीएफ व सुरक्षा मुख्यालय में दिया जाएगा।
इन कमांडो को बाद में विभिन्न राज्यों में विशेषज्ञ एजेंसियों से भी प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। बहरहाल टीम को सोमवार से औपचारिक तौर पर प्रभावी कर दिया गया।
डीजीपी ने दी जानकारी
पुलिस रेडियो मुख्यालय के सभागार में सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में नए कमांडो दल के सदस्यों को डीजीपी आनंद लाल बनर्जी, एडीजी कानून-व्यवस्था मुकुल गोयल, आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता, आईजी टेलीकॉम असीम अरुण व अन्य अधिकारियों ने संबोधित किया।
अधिकारियों ने इस मौके पर कमांडो की विशिष्ट टीम के गठन के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की। यह बताया गया कि शुरुआती चरण में ‘वार’ टीम अपराधियों के खिलाफ कार्य करेगी और कानून-व्यवस्था में मदद करेगी।
आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता ने बताया कि किस तरह टीम के सदस्यों को अभिसूचना संकलन करना होगा, कैसे उन्हें गिरफ्तारी करनी चाहिए और साथ ही उन्हें नियमों व कानून की भी सही जानकारी होनी चाहिए।
अधिकारियों ने कहा कि अभी एटीएस की कमांडो टीम आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए गठित है लेकिन आगे चलकर वार टीम का विस्तार किया जाएगा और इसे आतंकियों व नक्सलियों से भी निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
कानून व्यवस्था में करेंगी मदद
पुलिस रेडियो मुख्यालय के सभागार में सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में नए कमांडो दल के सदस्यों को डीजीपी आनंद लाल बनर्जी, एडीजी कानून-व्यवस्था मुकुल गोयल, आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता, आईजी टेलीकॉम असीम अरुण व अन्य अधिकारियों ने संबोधित किया।
अधिकारियों ने इस मौके पर कमांडो की विशिष्ट टीम के गठन के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की। यह बताया गया कि शुरुआती चरण में ‘वार’ टीम अपराधियों के खिलाफ कार्य करेगी और कानून-व्यवस्था में मदद करेगी।
आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता ने बताया कि किस तरह टीम के सदस्यों को अभिसूचना संकलन करना होगा, कैसे उन्हें गिरफ्तारी करनी चाहिए और साथ ही उन्हें नियमों व कानून की भी सही जानकारी होनी चाहिए।
अधिकारियों ने कहा कि अभी एटीएस की कमांडो टीम आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए गठित है लेकिन आगे चलकर वार टीम का विस्तार किया जाएगा और इसे आतंकियों व नक्सलियों से भी निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
एसॉल्ट रायफल और डंडे में फर्क
डीजीपी एएल बनर्जी ने इस मौके पर कहा कि पहले उन्हें उतना ही पता था कि असीम अरुण ने अलीगढ़ व आगरा में तैनाती के दौरान स्वाट टीम का गठन किया है लेकिन यह क्या है इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं थी।
जब वह एडीजी तकनीकी सेवा बने तब असीम अरुण की उनके साथ तैनाती हुई। इसके बाद ही वह समझ सके कि कमांडो टीम का किस उद्देश्य से गठन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मैंने एके-47 व इनसॉस रायफल से लैस कई पुलिसकर्मियों से यह पूछा है कि वह उन्हें चलाने में कितने सिद्धहस्त हैं, तो यही जवाब मिला कि चलाना नहीं आता है।
डीजीपी ने कहा कि बगैर प्रशिक्षण के इस तरह के शस्त्रों व डंडे में क्या अंतर रह गया।
रिफ्रेशर कोर्स कराया जाए
डीजीपी ने कहा कि कमांडो टीम का गठन करने में अहम भूमिका निभाने वाले आईजी आशीष गुप्ता, असीम अरुण, राजीव सब्बरवाल, एसपी प्रभाकर चौधरी आदि ने जिस तरह एनएसजी आदि एजेंसियों से प्रशिक्षण लिया है वैसे ही टीम की सभी सदस्यों को अतिरिक्त प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि डेढ़ माह का जो टीम को प्रशिक्षण दिया जा रहा, वह समय कम है। ऐसी टीम को लगातार रिफ्रेशर कोर्स कराया जाना चाहिए।
सैल्यूट तो सही से कर नहीं पा रहे...
समारोह के दौरान ‘वार’ टीम के सदस्यों ने डीजीपी को एक-एक कर सैल्यूट कर अपना परिचय बताया। डीजीपी ने कहा कि सैल्यूट करने वाले कई कमांडो सही से सैल्यूट भी नहीं कर पाए। इसके लिए उन्हें सही से ट्रेनिंग दिलाई जाए।
आईजी टेलीकॉम असीम अरुण ने भी कहा कि अभी इन कमांडो का चयन हुआ है और प्रशिक्षण में कई कमियां दिख रही हैं, जिन्हें दूर किया जाऐगा।
सेवा में शायद ही कभी चलाया शस्त्र
डीजीपी ने कहा कि प्रशिक्षण पर वह बार-बार महत्व इसलिए दे रहे हैं क्योंकि, बगैर इसके स्ट्राइक फोर्स हमेशा पैमाने पर खरा नहीं उतर सकती।
उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि 30 वर्षों से अधिक की सेवा के दौरान उन्होंने प्रशिक्षण के अलावा शायद ही कभी खुद शस्त्र चलाया हो। ऐसे में वह लगातार प्रशिक्षण और प्रशिक्षण के बाद रिफ्रेशर कोर्स के महत्व को समझते हैं।
5 हजार कारतूसों की हुई व्यस्था
आईजी एसटीएफ ने कहा कि जिस तरह के आधुनिक असलहे वार टीम को मिले हैं, उसे चलाने में उन्हें निपुणता होनी चाहिए।
उन्हें इस बात का विश्वास होना चाहिए कि जो असलहा उनके पास है, उसे वह अच्छे से चला सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए कमांडो को उनके पास मौजूद असलहों से खूब अभ्यास करना होगा।
यह अभ्यास पीएसी वाहिनियों में कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके पांच हजार कारतूसों की व्यवस्था की गई है।
क्या है वार
अमेरिका की स्पेशल वीपन एंड टैक्टिक्स टीम जिसे हिंदी में विशिष्ट आयुध एवं रणकौशल टीम कहा जा सकता है कि तर्ज पर इस टीम को तैयार किया जा रहा है। स्वाट के हिंदी नामकरण के अनुसार ही इसे विशिष्ट आयुध रणकौशल टीम यानी ‘वार’ नाम दिया गया है।
प्रतिनियुक्ति पर गए यूपी काडर के आईपीएस अंकज शर्मा ने ही स्वाट नाम का हिंदीकरण कर इसे ‘वार’ नाम दिया।
शुरुआती दौर में अपराधियों से दो-दो हाथ करने के बाद इन कमांडो की संख्या में बादमें विस्तार किया जाएगा और उन्हें नक्सलियों व आतंकियों से निपटने के लिए भी तैयार किया जाएगा।
ये होंगे हथियार
ग्लॉक पिस्टल: यह अत्याधुनिक पिस्टल अन्य पिस्टल से काफी हल्की होती है। रात में भी बेहतर निशाना साधने की डिवाइस इस पिस्टल को और खास बनाती है।
एमपी-5: यह एक मशीन पिस्टल है। एके-47 रायफल जैसी दिखने वाली इस मशीन पिस्टल को क्लोज रेंज में बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।
बुलेटप्रूफ हेलमेट: इस हेलमेट से गोली लग कर छिटक जाती है।
आधुनिक चश्मा: इस चश्मे से गोली चलने पर किसी तरह के टुकड़े या धूल-मिट्टी आदि आंख में नहीं जा पाती है।
ड्रोन - इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जिसमें कैमरा लगाकर कहीं का भी फोटो लिया जा सकता है।
ऐसे बनेगी टीम
नई टीम आगे चलकर बन जाएगी मास्टर ट्रेनर
वार टीम के प्रशिक्षण के बाद में यह इस टीम के सदस्य बतौर मास्टर ट्रेनर अन्य टीमों को प्रशिक्षित करेंगे।
डीजीपी ने कहा कि नई बनने वाली टीमों के प्रशिक्षण पर भी खास ध्यान रखा जाएगा।
हर जिले में तैनात होगी वार टीम
इस खास कमांडो टीम की शुरुआत अलीगढ़ और फिर आगरा से हुई। डीजीपी ने कहा कि आगे चलकर सभी जिलों में ऐसी टीमों का गठन किया जाएगा।