लखनऊ। राह चलते अचानक पुलिस, एंबुलेंस या कोई और मदद की जरूरत पड़ जाए तो परेशान न हों, इसके लिए शहर के दस प्रमुख चौराहों पर विजिटर बेल लगाई गई हैं। हालांकि, कहीं ये बेल इतनी आड़ में लगी हैं कि आसानी से दिखती ही नहीं तो कहीं खराब पड़ी है। दस में से करीब छह बेल ही काम कर रही हैं। वहीं, आम जनता तो दूर यातायात पुलिसकर्मियों तक को इनके उपयोग की जानकारी नहीं है। ऐसे में अच्छी पहल का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।
स्मार्ट सिटी के इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के तहत हजरतगंज, आईजीपी, 1090, पॉलीटेक्निक, यदुनाथ चौक (कैंट), दुबग्गा, बाराबिरवा, अहिमामऊ, कपूरथला और आईटी चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस बूथ या इसके आसपास डेढ़ साल पहले विजिटर बेल लगाई गई। यातायात पुलिसकर्मी इसे इमरजेंसी कॉल बॉक्स भी कहते हैं। बेल में दो बटन व एक स्पीकर होता है। बटन दबाते ही आईटीएमएस के लालबाग स्थित कंट्रोल रूम में कॉल लगती है, जहां 24 घंटे पुलिसकर्मी समस्या सुनते हैं और तुरंत मदद मिलती है। शिकायत को रिकॉर्ड करने के साथ दर्ज कर लिया जाता है। आईटीएमएस के कंट्रोल रूम से इसकी प्रति ले सकते हैं।
गंज चौराहे पर आसानी से नहीं दिखती बेल
हजरतगंज चौराहे पर पुलिस बूथ के किनारे बेल इतनी आड़ में लगी है कि आसानी से नहीं दिखती। ऐसे में इसका उपयोग नहीं हो पा रहा। यहां के अधिकतर पुलिसकर्मी भी नहीं जानते कि विजिटर बेल और इसका उपयोग क्या है। वहीं, 1090 चौराहे पर तैनात टीएसआई ने पूछने पर कहा कि यह एनाउंसमेंट सिस्टम है और पब्लिक के इस्तेमाल की चीज नहीं है। आईटी चौराहे पर पुलिस बूथ के बाहर बॉक्स तो लगा है, पर बेल गायब है। टीएसआई ने बताया कि बेल की मरम्मत कराई जा रही है। दुबग्गा, अहिमामऊ और कपूरथला की विजिटर बेल भी खराब मिली। अन्य चौराहों पर भी इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
सौ शिकायतों में से 70 पुलिसवालों ने ही कीं
आईटीएमएस के प्रभारी व उपनिरीक्षक राम कृपाल ने बताया कि इमरजेंसी कॉल बॉक्स से एक साल में लगभग सौ शिकायतें आईं हैं। हालांकि, इसमें से करीब 70 पुलिसकर्मियों ने ही की हैं। आम जनता ने 30 शिकायतें ही की हैं। राम कृपाल ने बताया कि खराब बेल ठीक कराने को लिखा-पढ़ी की गई है। आम जनता को भी इसके बारे में जागरूक करने की तैयारी है।
कैमरे की भी रहती है बेल पर पैनी नजर
विजिटर बेल बजाने वाला शख्स आईटीएमएस के कैमरे में कैद हो जाता है। इससे जरूरत पर उसकी पहचान की जा सके। ‘अमर उजाला’ ने पॉलीटेक्निक चौराहे पर तैनात टीएसआई मो. सिराजुद्दीन खां से विजिटर बेल के उपयोग के बारे में पूछा। इस पर उन्होंने बेल का बटन दबाया तो आईटीएमएस के कंट्रोम रूम से महिला आरक्षी ने समस्या पूछी। टीएसआई ने पर्स गिरने की बात कही तो आरक्षी ने चौराहे के पुलिस बूथ में जानकारी देने और उसके बाद आईटीएमएस आकर शिकायत की कॉपी ले जाने को कहा। टीएसआई बेल के पास से हटे ही थे कि चौराहे पर लगे लाउडस्पीकर पर एनाउंसमेंट होने लगा कि टीएसआई महोदय बेल तो आपने बजाई है, क्या आपका पर्स गिरा है? इस पर टीएसआई ने कंट्रोल रूम को बताया कि वह बेल चेक कर रहे थे। तब कंट्रोल रूम से बताया गया कि ये बेल कैमरे की निगरानी में है और शिकायत करने वाले का फोटो व वीडियो रिकॉर्ड हो जाता है।
अधिकतर यातायात कर्मियों को जानकारी नहीं
‘अमर उजाला’ ने बर्लिंगटन चौराहे पर तैनात टीएसआई व ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से विजिटर बेल के बारे में पूछा तो उन्होंने इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही। हजरतगंज चौराहे पर तैनात यातायात पुलिसकर्मियों व कुछ होमगार्डों ने भी यही कहा। 1090 चौराहे पर तैनात आरक्षी व होमगार्ड से लेकर टीएसआई तक को इस बेल की जानकारी नहीं है। डीसीपी, यातायात ख्याति गर्ग स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत आईटीएमएस ने विजिटर बेल लगवाई है। वहीं, आईटीएमएस अभी यातायात पुलिस को सौंपा नहीं गया है। ऐसे में विजिटर बेल या इसके रखरखाव और इस्तेमाल को लेकर जानकारी नहीं है।