नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के आदेश और सरकार के दिशा निर्देश के बाद कई जिलों में पटाखों पर बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध से पुलिस पसोपेश में है। व्यापारियों पर कार्रवाई से उनके उत्पीड़न का डर हैं वहीं, निर्देशों में ढिलाई पर सरकार की गाइडलाइन के उल्लंघन का खौफ। ऐसे में पुलिस बीच का रास्ता तलाशने में जुट गई है। जल्द ही डीजीपी मुख्यालय स्तर से इस संबंध में आदेश जारी हो सकते हैं।
पुलिस अधिकारी इस पर मंथन कर रहे हैं कि प्रतिबंध के बावजूद अगर कोई पटाखे जलाता है तो उसकी शिनाख्त किस तरह और कार्रवाई कैसे की जाएगी। इसी तरह जिस व्यापारी ने लाइसेंस लेकर माल खरीद लिया है उसके साथ क्या किया जाए? माल को कहां स्टोर कराया जाए? इन पर किस तरह की कार्रवाई की जाए? अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार का कहना है कि एनजीटी और प्रदेश सरकार के आदेशों का पालन कराया जाएगा। इसे लेकर डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी की ओर से पटाखों को लेकर सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
व्यापारियों ने मांगी तीन दिनों की मोहलत
पटाखा व्यापारियों ने सरकार से तीन दिनों की मोहलत मांगी है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले 8 महीने से काम वैसे ही प्रभावित था। अब मौका आया तो इस तरह के प्रतिबंध लग गए। प्रतिबंध भी तब लगे जब थोक व्यापारियों ने अपने यहां दीवाली के हिसाब से स्टॉक रख लिया। पटाखा एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश गुप्ता ने बताया कि एसोसिएशन के पदाधिकारियों का प्रतिनिधि मंडल उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, कानून मंत्री बृजेश पाठक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से मुलाकात कर चुका है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने तीन दिनों की मोहलत पटाखे बेचने के लिए मांगी है, ताकि स्टॉक निकाला जा सके। महेश गुप्ता बताते हैं कि थोक व्यापारी तीन महीने पहले ही अपना माल क्रेडिट पर उठा लेते हैं। यहां से हजारों की संख्या में छोटे-छोटे व्यापारी माल उधारी पर ले जाते हैं और बिक्री होने के बाद पैसा देते हैं। थोक व्यापारी तो दोनों ओर से फंस चुका है। जो माल क्रेडिट पर उठाया है उसका पैसा समय से नहीं दिया तो ब्याज लगेगा। छोटे व्यापारी जो माल ले गए हैं उनकी बिक्री नहीं हुई तो वह पैसा कैसे दे सकेंगे? महेश ने बताया कि उप मुख्यमंत्री, मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने इस मसले पर मुख्यमंत्री से बात कर हल निकालने का वादा किया है।